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बदली बयार का असर तो नहीं : कोयलांचल के नाराज भाजपा कार्यकर्ताओ को अब क्यों मिलने लगी है सीधी एंट्री,अब आगे क्या

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 5, 2026, 1:24:15 PM

धनबाद(DHANBAD):कोयलांचल में नाराज भाजपा कार्यकर्ताओ को "पुचकारा" जा रहा है. उन्हें गुस्सा थूकने को कहा जा रहा है.  धनबाद में भाजपा कार्यकर्ताओं की अचानक पूछ बढ़  गई है.  कार्यकर्ताओं के फोन अब बड़े भाजपा नेता उठाने  लगे हैं.  किसी भी गुट का   कोई भी कार्यकर्ता हो,  किसी भी नेता को फोन करता है तो उसे तरजीह मिलने लगी है.   सोशल मीडिया भी इसका प्रमाण है.  सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले तक आग उगलने वाले कार्यकर्ता अब थोड़ा शांत दिख रहे हैं.  सोशल मीडिया पर अब तीखी  टिप्पणियां नहीं आ रही है.  दरअसल, धनबाद में मेयर के चुनाव को लेकर कार्यकर्ता बंट  गए थे.  

हाथ तो मिला  रहे हैं, लेकिन दिल से कितना मिल रहा 

अभी भी वह हाथ तो मिला  रहे हैं, लेकिन दिल से कितना मिल रहे हैं, यह  तो वही जाने, लेकिन यह बात अब धीरे-धीरे पुष्ट होने लगी है कि कार्यकर्ताओं की पूछ बढ़ गई है.  पहले कार्यकर्ताओं का आरोप था कि जिले के नेता अपने इर्द -गिर्द रहने वाले लोगों की बात सुनते थे.  उन्ही  के सुझाव पर काम करते थे.  इस वजह से कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग नाराज चल रहा था.  यह  नाराजगी महानगर जिला अध्यक्ष को लेकर भी शुरू हुई थी.  हालांकि महानगर जिला अध्यक्ष के चयन को लेकर एक वर्ग आज भी नाराज है.  लेकिन मेयर चुनाव को लेकर जो नाराजगी थी, उसे धीरे-धीरे कम करने की कोशिश शुरू की गई है. 

नेता कहते -गिला - शिकवा छोड़िए, आई भेंट कीजिये
 
सूत्र बताते हैं कि नेता के समर्थक कार्यकर्ताओं के पास जाते हैं और नेताजी से बात कराते हैं.   नेताजी कहते हैं कि गिला - शिकवा छोड़िए, आई भेंट कीजिये।  कुछ लोग भेंट करने गए भी हैं.  दरअसल, मेयर  चुनाव में भाजपा ने संजीव अग्रवाल को अपना समर्थित उम्मीदवार बनाया था.  स्थिति ऐसी बना दी गई कि पूर्व मेयर  शेखर अग्रवाल भाजपा ही छोड़ दिए और झामुमो  के पाले  में चले गए.  उसके बाद की कहानी तो और भी दिलचस्प रही.  भाजपा के पूर्व विधायक संजीव सिंह बागी बनकर चुनाव मैदान में उतर गए.  चुनाव प्रचार के दौरान भी कई तरह की बातें हुई.  कार्यकर्ता भी बंटे -बंटे  बेट दिखे।  भाजपा में रहते हुए कार्यकर्ताओं ने भाजपा के खिलाफ काम किया। 

मेयर चुनाव से बिगड़ी बात को सुधारने की कोशिश 
 
वैसे भी, भाजपा के नेताओं ने संजीव सिंह के खिलाफ कई तल्ख टिप्पणियां की.  इससे भी चुनाव पर असर पड़ा.  भाजपा के कुछ बड़े नेताओं के खिलाफ 
गोलबंदी हुई और इसका फायदा संजीव सिंह को मिला।  फिर तो संजीव सिंह भारी मतों से मेयर का चुनाव जीत गए.  यह  अलग बात है कि लोग भी यह मानते हैं कि संजीव सिंह के खिलाफ तल्ख टिप्पणियां उनके लिए "संजीवनी" का काम किया।  झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो भी हाल के दिनों में कहा था कि संजीव सिंह को जाकर सांसद ढुल्लू महतो के  प्रति धन्यवाद  करना चाहिए।  अगर सांसद  इस तरह की टिप्पणियां नहीं करते, तो शायद संजीव सिंह को चुनाव जीतने में परेशानी हो सकती थी.  खैर, जो भी हो, लेकिन संजीव सिंह तो मेयर बन गए हैं और उनकी नजर लोयाबाद के कंधे पर चढ़कर कतरास बाघमारा पहुंचने की है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

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