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झारखंड पुलिस एसोसिएशन में बढ़ी तकरार, प्रदेश उपाध्यक्ष ने नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 14, 2026, 11:21:12 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): झारखंड पुलिस एसोसिएशन के भीतर इन दिनों विवाद गहराता नजर आ रहा है. संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष रोहित कुमार रजक ने अपने ही शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि संगठन के बड़े पदाधिकारी पुलिसकर्मियों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय सत्ता और सुविधाओं का आनंद लेने में व्यस्त हैं. इससे वर्दीधारियों के बीच नाराजगी लगातार बढ़ रही है.

रोहित कुमार रजक ने आरोप लगाया कि संगठन अब पुलिस परिवार से जुड़े अहम मुद्दों से दूर हो चुका है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रमोशन, शिकायत निवारण और पुलिसकर्मियों की बुनियादी समस्याओं जैसे विषयों पर कोई गंभीर पहल नहीं की जा रही है. उनका कहना है कि चुनाव के बाद संगठन की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल गई हैं.

प्रदेश उपाध्यक्ष ने संगठन के वाहन के कथित दुरुपयोग का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन के वाहन का बड़े पैमाने पर निजी कार्यों में इस्तेमाल किया गया. उनका आरोप है कि वाहन का उपयोग घर से कार्यालय और कार्यालय से घर आने-जाने के लिए किया जा रहा है. लगातार उपयोग के कारण वाहन की मरम्मत पर करीब एक लाख रुपये तक खर्च होने की बात भी उन्होंने कही. इतना ही नहीं, रोहित कुमार रजक ने यह भी आरोप लगाया कि निजी वाहनों में डीजल खर्च के नाम पर हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब संगठन सदस्यों के हित में ठोस काम नहीं कर पा रहा है, तो इस तरह के खर्चों का औचित्य क्या है.

उन्होंने कहा कि संगठन के पास आने वाला पैसा कोई सरकारी फंड नहीं, बल्कि वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के चंदे से जमा राशि है. ऐसे में उसका उपयोग केवल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के हित में होना चाहिए. उन्होंने फिजूलखर्ची पर रोक लगाने और खर्चों में पारदर्शिता लाने की मांग की. गौरतलब है कि झारखंड पुलिस एसोसिएशन इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है. संगठन की कार्यशैली और आर्थिक खर्चों को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच सवाल उठने लगे हैं. जानकारी के अनुसार, संगठन को हर साल करीब 42 लाख रुपये चंदे के रूप में प्राप्त होते हैं, जिसके उपयोग को लेकर अब जवाबदेही की मांग तेज हो गई है.

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