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जमशेदपुर में सड़कों पर दौड़ने के बजाए कबाड़ में सड़ रही हैं 5.50 करोड़ की 50 सिटी बसें

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 27, 2026, 3:27:34 PM

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): लौहनगरी जमशेदपुर में सिटी बसों को दौड़ने का सपना आज कबाड़ में दम तोड़ रहा है. शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम की बदहाली की सबसे बड़ी तस्वीर सिदगोड़ा के बारीडीह स्थित डिपो में नजर आ रही है. शहर की सड़कों पर आधुनिक और सस्ती परिवहन व्यवस्था का सपना लेकर 50 सिटी बसों को सड़कों पर उतारा गया था. लेकिन ये बसें अब जंग खाकर कबाड़ में तब्दील हो रही हैं. करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदी गई इन बसों का उपयोग लोगों की सुविधा के बजाय सरकारी लापरवाही की मिसाल बनकर रह गया है. वर्ष 2010 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत जमशेदपुर में सिटी बस सेवा शुरू की गई थी. नगर विकास विभाग ने करीब 5.50 करोड़ रुपये की लागत से 50 बसें खरीदी थीं. इसका उद्देश्य था कि शहरवासियों को सस्ती, सुरक्षित और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. बसों के संचालन की जिम्मेदारी जेटीडीसी को सौंपी गई थी. 

2022 में बसें को कंडम हुए घोषित
शुरुआती दिनों में लोगों ने इस सेवा का लाभ भी उठाया. लेकिन कुछ ही वर्षों में व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई. फंडिंग विवाद, एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी, बसों के रखरखाव में लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के कारण धीरे-धीरे बसें सड़कों से गायब होने लगीं.  28 अगस्त 2014 में जेटीडीसी ने लगातार हो रहे घाटे का हवाला देते हुए बस सेवा वापस नगर विकास विभाग को सौंप दी. इसके बाद बसें डिपो में खड़ी-खड़ी खराब होती रहीं. हालत यह हो गई कि वर्ष 2022 में एमवीआई ने सभी बसों को कंडम घोषित कर दिया. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये की बसों को कबाड़ बनने तक क्यों छोड़ दिया गया. पिछले 16 वर्षों में कई बार बस सेवा शुरू करने की घोषणाएं हुईं, लेकिन हर योजना सरकारी फाइलों में ही दबकर रह गई.

शहर ऑटो और ई -रिक्शा के भरोसे चल रहा
शहर में सिटी बस सेवा बंद होने के बाद पूरा शहर ऑटो और ई-रिक्शा के भरोसे चल रहा है. जहां सिटी बसों में लोग 5 से 10 रुपए देकर अपने गंतव्य स्थान को जाते थे, वही अब ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा मनमाना किराया लोगो से वसूला जा रहा है. शहर में करीब 25 हजार ऑटो और ई-रिक्शा विभिन्न रूटों पर दौड़ रहे हैं, लेकिन इनके संचालन की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है. न तय रूट हैं, न किराए पर नियंत्रण और न ही यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी. नतीजा यह है कि ऑटो और ई-रिक्शा के कारण शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर हर दिन लंबा जाम लगता है और ट्रैफिक व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है.


अब सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी
शहर में अब लो-फ्लोर सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी हो रही है. 100 से अधिक लो-फ्लोर सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी है. जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) द्वारा इन बसों का प्रस्ताव तैयार कर नगर विकास विभाग को भेजा है. हालांकि शहरवासी अब यह जानना चाहते हैं कि क्या इस बार बसें सच में सड़कों पर दौड़ेंगी या फिर पिछली योजना की तरह केवल कबाड़ बनकर रह जाएंगी. इन बसों के चलने से शहर के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. 

 

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