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बालासोर रेल हादसा: घर पहुंचे जामा का राज मिस्त्री, दर्द उठने पर पीजेएमसीएच में भर्ती

BY -
Aditya Singh
Aditya Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 2:45:32 AM

दुमका (DUMKA): 2 जून की शाम ओडिसा के बालासोर में ट्रेन दुर्घटना में घायल दुमका के लोग अपने घर पहुचने लगे हैं. मंगलवार को जामा थाना के खटंगी का एक युवक सुरेंद्र मरीक जो राजमिस्त्री का काम करने चेन्नई जा रहा था.  अपने घर लौटा लेकिन घर पहुचने पर जब दर्द की समस्या उत्पन्न हुई तो परिजन उसे फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया.

चारों तरफ मचा था चीख पुकार

घटना के बाबत उसने बताया कि चारों ओर चीख पुकार मची हुई थी. हर कोई जान बचाने के लिए अपने स्तर से प्रयास कर रहा था. आधे घंटे के बाद जब एंबुलेंस व लोगों की आवाज सुनाई दी.  तब लगा कि अब जान बच जाएगी. जवानों ने उसके साथ पांच अन्य लोगों को डिब्बे से बाहर निकाल कर भद्रक अस्पताल में भर्ती कराया. अस्पताल में भी लोग मरते जा रहे थे. सीने में दर्द की वजह से लगा कि अब मेरी भी जान चली जाएगी. लेकिन डाक्टरों के इलाज की वजह से आज अपनों के बीच हूं.

बोलेरो से पहुंचाया दुमका

सुरेंद्र ने बताया कि एक जून को जिले के करीब 18 लोगों के साथ पहली बार मजदूरी करने के लिए चेन्नई जा रहा था. शालीमार स्टेशन से कोरोमंडल ट्रेन पकड़ी. जनरल डिब्बे में पैर रखने की जगह नहीं थी. 15 सौ रुपया का टिकट लेने के बाद जगह नहीं मिली तो खड़े-खड़े सफर किया. शुक्रवार की शाम अचानक जोर की आवाज हुई और चारों ओर बचाओ-बचाओ की आवाज सुनाई देने लगी. डिब्बे में अंधेरा हो गया. जब लोग बचाने आए तो पता चला कि कई साथी दबे हुए हैं. जवानों ने एक-एक कर सभी को बाहर निकाला. 12 साथी का पता ही नहीं चला. उसे और पांच साथियों को इलाज के लिए भद्रक अस्पताल में भर्ती कराया. सरकार और डाक्टर ने अच्छा से अच्छा इलाज किया. तीन जून को अस्पताल से छुटटी मिली. सरकार ने अन्य लोगों के साथ बोलेरो से दुमका पहुंचाया. घर पहुंचने पर परिवार के सभी लोग रो पड़े. अचानक दर्द उठने पर अस्पताल लेकर आए. बताया कि हादसे के बाद जिंदा कम और लाश ज्यादा नजर आ रही थी. भगवान का शुक्र है कि वह जीवित बच गया.

रिपोर्ट. पंचम झा  

Tags:Injured of BalasoreMtrain accidentreached Dumkasaid that dead bodiesare more visibleafter the accident.

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