धनबाद(DHANBAD): कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उत्तर प्रदेश में 1074 किलोमीटर चलेगी तो झारखंड में 804 किलोमीटर का रास्ता तय करेगी. असम में 833 किलोमीटर चलने का टारगेट है. झारखंड के कुल 13 जिलों को कवर किया जाएगा. उत्तर प्रदेश के 20 जिलों को टारगेट किया जाएगा. असम के 17 जिले यात्रा की जद में होंगे. धनबाद होकर भी यह यात्रा गुजरेगी. भारत जोड़ो न्याय यात्रा का रूट चार्ट जारी होते ही मीन मेख , उद्देश्य,लाभ -हानि पर चर्चा शुरू हो गई है. जिधर -जिधर से यात्रा गुजरेगी ,अगल -बगल की लोक सभा सीटों पर दावेदारी से भी जोड़ कर देखा जा रहा है.
झारखण्ड में आठ दिन रहेगी यात्रा
कांग्रेस की न्याय यात्रा में झारखंड पर भी फोकस है. असम में यह यात्रा 8 दिन दौरा करेगी जबकि बिहार में चार दिन और झारखंड में फिर 8 दिन यह यात्रा झारखंड के विभिन्न जिलों से गुजरेगी. उत्तर प्रदेश में तो यह यात्रा 11 दिन विभिन्न जगहों से गुजरेगी. उत्तर प्रदेश तो इस बार चुनाव में हर पार्टियों के निशाने पर रहेगा. भाजपा भी चाहेगी कि 80 में से 70 से 75 सीट लोकसभा सीट जीत ले जबकि इंडिया गठबंधन यह चाहेगा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीट कम कराकर उसे बैक फुट पर लाया जाए. जो भी हो , झारखंड में यह यात्रा धनबाद होकर भी गुजरेगी. झारखंड में न्याय यात्रा का 8 दिन यह बताता है कि झारखंड को इंडिया गठबंधन या कांग्रेस भी टारगेट में रखे हुए है. फिलहाल जो सूत्र बताते हैं, उसके अनुसार झारखंड के लगभग 7 या 8 सीट पर कांग्रेस की नजर है. यह अलग बात है कि अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है.
सात या आठ सीटों पर कांग्रेस कर सकती है दावा
लेकिन राजनीतिक हल्को में चल रही चर्चा के मुताबिक कांग्रेस धनबाद, गोड्डा , लोहरदगा, चाईबासा, जमशेदपुर, रांची, खूंटी पर नजर गड़ाए हुए है. रांची या जमशेदपुर में कांग्रेस अदला -बदली भी कर सकती है. चाईबासा से तो कांग्रेस का सीटिंग एमपी है. इसी प्रकार अगर राजद की बात की जाए तो पलामू और कोडरमा पर राजद की नजर है. हजारीबाग सीट पर वामदल और जदयू की नजर है. वाम दल से भुनेश्वर मेहता हज़ारीबाग़ से सांसद रह चुके है. बची सीटों पर झारखंड मुक्ति मोर्चा लड़ सकता है. हालांकि यह तो चर्चा का आकलन है अंतिम निर्णय तो होना बाकी है. लेकिन 8 दिन की यात्रा यह बताती है कि झारखंड कांग्रेस के टारगेट लिस्ट में है. 2019 के लोकसभा चुनाव में झारखंड से भाजपा के 12 एमपी चुनाव जीते है. भाजपा यह चाहेगी कि झारखंड के 14 लोकसभा सीट उसे हासिल हो जाए. इसके लिए आदिवासी चेहरा बाबूलाल मरांडी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर मैदान में उतार दी है. जबकि कांग्रेस ने अल्पसंख्यक चेहरा को प्रभारी बनाकर अपनी मानसा जता दी है. अल्पसंख्यक वोटर झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थक कहे जाते हैं तो वह कांग्रेस को भी छोड़ते नहीं है. ऐसे में इस बात की भी चर्चा तेज है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने मिलकर ही मीर को झारखंड का नया प्रभारी बनाया है.
बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश पर रहेगा फोकस
यह बात भी सच है कि बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन अगर एकजुटता दिखलाई तो एनडीए को कड़ी चुनौती मिल सकती है. बंगाल और बिहार कांग्रेस के हिट लिस्ट में नहीं है लेकिन झारखंड और उत्तर प्रदेश को हिट लिस्ट में लेकर पार्टी चल रही है. राहुल गांधी के न्याय यात्रा से झारखंड में कांग्रेस को कितना लाभ मिलेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन कांग्रेसियों को इससे ऊर्जा मिलेगी, इसमें कोई दो मत नहीं है. इधर, भाजपा 22 जनवरी को होने वाले मंदिर के उद्घाटन के लिए अक्षत देकर लोगों को निमंत्रित करने के कार्यक्रम तेज कर दिया है. क्या सांसद , क्या विधायक, क्या कार्यकर्ता सारे लोग जोर लगाए हुए है. घर-घर पहुंचकर लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
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