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पलामू के इस धाम में देवी मां की है असीम कृपा, सभी दुखों से मिलता है छुटकारा, शैतान भी यहां हो जाते हैं नतमस्तक

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 9:06:09 AM

पलामू(PALAMU): हैदरनगर स्थित देवी धाम परिसर में चैती नवरात्र व शारदीय नवरात्र के अवसर पर लगने वाले मेले का सैकड़ों वर्षों पुराना इतिहास है. इस वर्ष भी चैती नवरात्र मेले में बड़ी संख्या में विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां आने से उन्हें विभिन्न बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है. श्रद्धालु मंदिर में आकर दर्शन व पूजा अर्चना करते हैं. यहां आने वाले अधिकतर लोग भूत-प्रेत जैसी बाधाओं से पीड़ित होने की बात कहते हैं जबकि कुछ का कहना है कि देवी मां की कृपा से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई है.

हैदरनगर के देवी मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं के स्थान होने के साथ-साथ यहां जिन्न बाबा का मजार भी है.  आज के दौर में सांप्रदायिक सौहार्द्र की इससे बेहतर तस्वीर शायद ही कहीं मिल पाएगी. एक ओर पूजा पाठ तो दूसरी ओर फातेहा और चादरपोशी वह भी मुस्लिम मौलवियों द्वारा किया जाना एक मिसाल है.

बता दें कि, पलामू जिला मुख्यालय से 85 किलोमीटर की दूरी पर हैदरनगर देवी धाम ऐतिहासिक,धार्मिक व आस्था का केंद्र है. चैत नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी मां के दर्शन व पूजन के लिए पहुंचते हैं. यहां झारखंड के पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा व पश्चिम बंगाल के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना व मिन्नतें मांगने आते हैं. उनका मानना है कि यहां आकर पूजा-अर्चना करने से उनके मनवांच्छित कार्य पूर्ण हो जाते हैं.

वहीं, देवी धाम के मुख्य पुजारी सुरेन्द्र दास त्यागी ने बताया कि हैदरनगर देवी धाम की मां जागृत रूप में स्थित हैं. नवरात्रि के समय यहां आस्था की भीड़ उमड़ती है. एक तरफ लोग पूजा अर्चना करते हैं तो दूसरी तरफ तांत्रिक टोना, सिद्धियों व प्रेत प्रकोप से बचाव के लिए देवी की उपासना करते हैं. अब इसे आस्था कहे या अंधविश्वास लेकिन देश भर से प्रेत प्रकोप से शांति के लिए लोग यहां खींचे चले आते हैं. प्रेत समाहित व्यक्ति माता मंदिर में आने पर नवरात्र के समय स्वंय ही झूमने लगते हैं.

वहीं, इस मेले के बारे में पलामू के पांडु प्रखंड निवासी बलिराम पांडेय ने बताया कि यह मेला सैकड़ों वर्ष से लगता चला आया है. इससे पहले इनके पिता जी इस मेला में आते थे. उनके साथ विभिन्न राज्यों के कई लोग भी हैं, जो विभिन्न बाधा से पीड़ित हैं. उनका मानना है कि देवी मां के दरबार में आने मात्र से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है. बलिराम पांडेय बताते हैं कि यहां पहले मिट्टी का छोटा मंदिर था. उस समय से उनके पिता जी इस मंदिर में आते रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह मंदिर परिसर सांप्रदायिक सौहार्द्र की एक जिंदा मिसाल है. उन्होंने मंदिर और मजार से जुड़ी कई कहानियों का भी जिक्र किया.  

क्या है धाम का इतिहास

वहीं, मंदिर के इतिहास के बारे में मंदिर कमेटी के सचिव रामाश्रय सिंह बताते हैं कि वैसे तो इस देवी धाम का लिखित इतिहास दर्ज नहीं है. लेकिन इस मंदिर को अपने पूर्वजों से इसके सैकड़ों वर्षों की मौजूदगी की बात सुनी है. सबसे पहले इस मंदिर में यहां के स्थानीय पंडितों द्वारा पूजा किया जाता था. तब यह मंदिर मिट्टी का हुआ करता था. दामोदर दुबे के पूजा अर्चना के समय में यहा आयोध्या से रामलीला मंडली दिखाने नागाबाबा आए.  नागाबाबा रामलीला मंडली के सुप्रसिद्ध व्यास थे.

नागाबाबा अयोध्या के प्रमोद वन के चेतना दास अखाड़ा के थे. नागाबाबा को देवी धाम पर ही रुक कर पूजा करने का अनुरोध किया गया था. जिसके बाद से नागाबाबा ने पूजा अर्चना के साथ-साथ मंदिर में कई विकास किए. सबसे पहले उन्होंने ही पत्थरों पर नक्कासी वाले खम्भों पर मंदिर का निर्माण कराया. नागाबाबा के बाद उनके गुरुभाई मुनि बाबा पूजा अर्चना करने लगे. उन्होंने मंदिर के गोलनुमा गुंबद का निर्माण कराया. मुनि बाबा के बाद उनके शिष्य सुरेंद्र दास त्यागी वर्तमान में मंदिर के गर्भगृह की पूजा करते हैं. उसके बाद देवी धाम समिति ने इस मंदिर में विशाल मंदिर का निर्माण कराया.

मनमोह लेता है देवी धाम मंदिर

देवी धाम मंदिर के प्रांगण की सुंदरता लोगों को आकर्षित कर लेती है. माता का विशाल गुंबद नुमा मंदिर के अलावा रामजानकी मंदिर, शिव पार्वती मंदिर, विशाल पीपल के पेड़ में ब्रह्म स्थान के साथ-साथ जीन बाबा का मजार भी परिसर में है.

चीनी की मिठाई का है महत्व

देवी धाम में प्रसाद के रूप में चीनी की मिठाई ही देवी मां को चढ़ाया जाता है. इसका कारण यह है कि चीनी की मिठाई को शुद्ध माना जाता है. इसमें किसी प्रकार का तेल का उपयोग नहीं होता है. साथ ही नारियल, सिंदूर व चुनरी आदि भी चढ़ाया जाता है जबकि जिन्न बाबा की मजार पर फातेहा के साथ-साथ चादर चढ़ाया जाता है.

प्रशासन की ओर से सुरक्षा के बेहतर है इंतजाम

मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रशाशन ने मेला के अवसर पर सुरक्षा का बेहतर प्रबंध किया है. उन्होंने बताया कि प्रतिदिन अनुमंडल पदाधिकारी गौरांग महतो सुरक्षा व व्यवस्था की समीक्षा कमेटी के साथ करते हैं. वह मेला का अवलोकन भी करते हैं. प्रशिक्षु आईपीएस सह हैदरनगर थाना प्रभारी दिव्यांश शुक्ला मेला का भ्रमण कर सुरक्षा कर्मियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मेला में महिला व पुरुष बीस जवानों के साथ पुलिस अधिकारी भी तैनात किए गए हैं. मगर विडंबना इस बात की है कि लाख प्रयास के बाद मेला को देखते हुए अतिरिक्त शौचालय व तालाब का सुंदरीकरण नहीं हो पाया. उन्होंने बताया कि इसके लिए कमेटी के लोग कई बार उपायुक्त से भी मिल चुके हैं.

20 लाख की लागत से बन रहा है भव्य गेट

मंदिर कमेटी से सचिव रामाश्रय सिंह ने बताया कि माता मंदिर के रस्ते में भव्य गेट का निर्माण शुरू कर दिया गया है.उन्होंने बताया कि गेट के निर्माण में बीस लाख रुपए लगने की उम्मीद है. फाउंडेशन का कार्य लगभग पूरा हो चुका है. नवरात्र के बाद और तेज गति से कार्य कराया जाएगा. उन्होंने बताया कि गेट बनने के बाद मंदिर की भव्यता और बढ़ जाएगी. गेट आकर्षण का केंद्र होगा.

 

 

 

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