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स्मृति शेष : दिशोम गुरु तो चले गए लेकिन अपने अतीत से उत्कर्ष की अमिट कहानी लिख गए !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 2:17:08 AM

धनबाद (DHANBAD) : वैसे तो शिबू सोरेन की चिता  की आग अब ठंडी हो गई है, लेकिन उनका कृतित्व अमर हो गया है. लाखों -करोड़ों लोगों के दिल में शिबू सोरेन ने अपनी जगह बना ली है और यह जगह वर्षों-वर्ष तक बनी रहेगी. आने वाली पीढ़ी उनकी गाथा सुन प्रेरणा लेती रहेगी. यह बात तो तय है कि जो आया है, वह जाएगा. लेकिन अपने संघर्ष की बदौलत जो सियासत को अपनी उंगलियों पर नचाए, जरूरत के हिसाब से उसे झुकाए, ऐसे विरले लोग ही होते है. ऐसे ही विरले लोगों में शिबू सोरेन का नाम आदर के साथ लिया जा रहा है, आगे भी लिया जाता रहेगा.  

शिवलाल से शिबू सोरेन बनने की कहानी संघर्षों की कहानी है

शिवलाल से शिबू सोरेन बनने की कहानी संघर्षों की कहानी है. इसलिए तो कहा जा रहा है कि अब कोई दूसरा शिबू सोरेन पैदा नहीं होगा. उनकी सोच समाज सुधार के प्रयास में अमिट छाप  छोड़ी है. जितनी बड़ी लकीर उन्होंने खींच दी है, उसको पार करना अब शायद मुमकिन नहीं है. शिबू सोरेन के अतीत से लेकर उत्कर्ष की कहानी संघर्षों के सिवा कुछ भी नहीं है. यह बात भी सच है कि अगर झारखंड बनने के बाद शिबू सोरेन पहले मुख्यमंत्री बनते तो आज झारखंड कुछ और होता. कम से कम झारखंड में निश्चित रूप से शराब बंदी लागू हुई होती. वन विभाग नाम की कोई चिड़िया नहीं होती. कोयले की अवैध खनन में लगे लोगों को कोऑपरेटिव बनाकर खदानों को हैंडोवर करने की कोशिश हुई होती. 

जब केंद्रीय कोयला मंत्री बने थे तो धनबाद में कहा था 
 
यहां बता दें कि शिबू सोरेन जब केंद्रीय कोयला मंत्री बने थे, तो उन्होंने धनबाद दौरे के क्रम में कहा था कि अवैध उत्खनन करने वाले गरीब-गुरुबों को को-ऑपरेटिव बनाकर खदानें दे देनी चाहिए. यह अलग बात है कि तकनीकी करने से यह मामला उलझ गया. क्योंकि बात आई थी को-ऑपरेटिव वाले खनन विशेषज्ञ कहां से रख पाएंगे. ऐसे में दुर्घटनाएं हो सकती है. खैर, यह प्रस्ताव तो आगे नहीं बढ़ा लेकिन यह बात भी सच है कि कोयले का अवैध उत्खनन भी नहीं रुका. अवैध उत्खनन के क्रम में अभी भी लोग दब कर मर रहे है. दिशोम  गुरु के अंतिम दर्शन के लिए मंगलवार को नेमरा  में भारी भीड़ जुटी.  लोग पैदल पहुंचे, गुरु जी के अंतिम दर्शन किये. 

अपने लाल के जाने के दुःख से प्रकृति भी रोई 

प्रकृति भी अपने लाल के जाने पर दुखित हुई. लोगो में  ललक ऐसी कि कोई पैदल तो कोई मोटरसाइकिल से नेमरा पहुंचे. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व डिप्टी सीएम सुदेश महतो एक ही बाइक से 7 से 10 किलोमीटर की यात्रा तय कर नेमरा पहुंचे. गाड़ियों की भीड़ ऐसी थी कि उनकी गाड़ियां बीच में ही अटक गई. फिर तो सुदेश महतो  बाइक के चालक बन गए और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा उनके साथ हो लिए. ऐसे में दोनों नेमरा  पहुंचे. पिता शिबू सोरेन की अंत्येष्टि के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भावुक  पोस्ट किया.  लिखा आज प्रकृति भी बहुत रोई, प्रकृति का सबसे प्यारा लाल आज प्रकृति की गोद में समा गया. अंतिम जोहर--- मेरे बाबा-- वीर दिशोम  गुरु शिबू सोरेन अमर रहें. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

Tags:DhanbadJharkhandShibu SorenPrakitiNemra

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