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देश में नरेगा-मनरेगा और अब वी बी जी राम जी की यात्रा ,राज्य सरकारों को कितना फ़ायदा,कितना नुकसान!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 4:54:33 PM

धनबाद(DHANBAD) | नरेगा के बाद मनरेगा और अब विकसित भारत जी राम जी.  लोकसभा में यह पारित हो गया लेकिन विपक्षी दलों के मन में अभी भी टीस  बना हुआ है.  चलिए पहले जान लेते हैं कि नरेगा, मनरेगा और अब विकसित भारत जी  राम जी की  देश में यात्रा कैसी रही? दरअसल नरेगा यानि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 में पारित हुआ.  इसका लक्ष्य था ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिनों के काम की गारंटी देना.  उसके बाद इसका नाम मनरेगा हो गया.  महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया, तब से यह महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के नाम से जाने जाने लगा और यह ग्रामीण आजीविका का एक बहुत बड़ा सहारा बन गया. 

कोबिड काल में देश को इसकी उपयोगिता समझ  में आई. थी 

कोबिड काल में देश को इसकी उपयोगिता समझ  में आई.  अब केंद्र सरकार ने मनरेगा को विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन  के नाम से बदल दिया है और अब यह विकसित भारत जी  राम जी के नाम से भी जाना जाने लगा है.  बताया गया है कि कई बिंदुओं पर इसमें बदलाव किए गए हैं, जिसमें मुख्य बदलाव यह है कि रोजगार के दिन 100 से बढ़कर 125 दिन किया गया है.  हंगामे के बीच  गुरुवार को लोकसभा में विकसित भारत जी  राम जी पारित कर दिया गया.  कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बिल को गांधी के सपने को साकार करने की ओर बढ़ाया गया कदम बताया.  उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों को मार दिया ,जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जीवित रखा है.  

2005 में यूपीए की सरकार ने नरेगा योजना शुरू की थी 

बता दें कि 2005 में यूपीए की सरकार ने योजना को लागू किया था.  इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई थी.  यह  योजना उनके लिए काफी महत्वपूर्ण थी, जिनके पास कोई कौशल या हुनर नहीं था.  यहां तक कि उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते कि वह दूसरे राज्यों में जाकर रोजगार की तलाश कर सके.  इस योजना के तहत पूरे देश में कुल 262 तरह के अलग-अलग काम कराए जाते रहे है.  मनरेगा की विशेषताएं यह भी रही है कि अगर किसी ने अपना नाम रजिस्टर्ड कराया है, तो उसे 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध करवाया जाता है.  काम उपलब्ध नहीं होने पर उस व्यक्ति को बेरोजगारी भत्ता मिलता है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि मनरेगा को बदलने की जरूरत है, क्योंकि बहुत सारे अनप्रोडक्टिव काम हो रहे थे. उन्होंने कहा कि योजना को लेकर तरह-तरह की शिकायतें आ रही हैं. उनके अनुसार बहुत जगहों पर सिर्फ कागज पर काम हो रहे थे और उसके बदले पैसे उठाए जा रहे थे. 

कृषि मंत्री का आरोप -विपक्षी दल के शासन वाले राज्य ऐसा करते थे 

उन्होंने कहा कि मनरेगा में 60 प्रतिशत पैसा मजदूरी के लिए और 40 प्रतिशत निर्माण सामग्री के लिए होता था, लेकिन विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों में मजदूरी का पूरा पैसा ले लिया जाता था, और सामग्री पर केवल 26 प्रतिशत, तो कई राज्यों में केवल 19-20 प्रतिशत खर्च किया जाता था. नाम बदलने और इसमें से गांधी के नाम को हटाए जाने को लेकर विपक्षी दल विरोध कर रहे है.   विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि मोदी सरकार महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाकर उनके आदर्शों से भटक रही है. नए बिल में खर्च के मद का बंटवारा कर दिया गया है. इसके तहत केंद्र सरकार 60 फीसदी हिस्सा वहन करेगी, जबकि राज्य सरकार 40 फीसदी हिस्से का वहन करेगी. पहाड़ी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार करेगी.विपक्षी दलों का कहना है कि मनरेगा के तहत मजदूरी का पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठाती थी. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि सरकार लगातार बजट में कटौती कर रही है.

विपक्षी दलों के आरोप पर क्या कहा कृषि मंत्री ने ---

 इस पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा का बजट बढ़ाया है, न कि इसे कम किया है.  नए बिल के सेक्शन 5(1) को लेकर भी विपक्षी दलों  का विरोध  है. उनका कहना है कि किस राज्य में इस योजना को लागू किया जाएगा और कब लागू किया जाएगा, इसका निर्धारण केंद्र सरकार करेगी. साथ ही यदि किसी राज्य के पास बजट कम है, तो केंद्र सरकार उसी बजट के अनुरूप उसे काम सौंपेगी. जबकि पहले ऐसी कोई बाध्यता नहीं थी. विपक्षी दलों का कहना है कि इससे सबसे अधिक गरीब राज्य प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास बजट नहीं होगा. बजट नहीं होगा, तो वह लोगों के लिए काम नहीं ले सकेंगे. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

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