☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. News Update

गिरिडीह: बंद पड़े दो बड़े कोयला खदान मामले में दो सत्ताधारी दल जेएमएम और माले आया सामने, जानिये क्या कहा

गिरिडीह: बंद पड़े दो बड़े कोयला खदान मामले में दो सत्ताधारी दल जेएमएम और माले आया सामने, जानिये क्या कहा

गिरिडीह (GIRIDIH): सीसीएल के अधीन गिरिडीह बनियाडीह के बंद पड़े ओपनकास्ट और कब्रीबाद कोयला खदान मामले में दो सत्ताधारी राजनीति दल अब आमने-सामने आ चुके है. बंद पड़े दोनों कोयला खदान मामले में पिछले दिनों भाकपा माले के बगोदर विधायक विनोद सिंह और माले नेताओ ने धरना दिया था. इसके दो दिन बाद मंगलवार को गिरिडीह के सदर विधायक सुदिव्या कुमार सोनू और जेएमएम के जिला अध्यक्ष संजय सिंह माले पर जमकर भड़के. प्रेसवार्ता कर कहा कि जिन्हे गिरिडीह के दोनो कोयला खदान के खनन का इतिहास तक नहीं पता है, वो अब राजनीति कर रहे हैं.

सदर विधायक सोनू ने माले को कुकरमुत्ते वाला राजनीतिक दल की संज्ञा देते हुए कहा कि दोनों कोयला खदान सीटीओ के अभाव में बंद पड़े हैं और इसी सीटीओ का एक तकनीक वर्ड tor है. भाकपा माले को इस tor का फुलफार्म बताना चाहिए. इसके बाद दोनो कोयला खदान को सीटीओ दिलाने की राजनीति करनी चाहिए. ऐसे ही इन गंभीर मामले में भाकपा माले के नेताओ और विधायक को कूदने से परहेज करना चाहिए.

खदान शुरू होने की बढ़ी उम्मीद

सदर विधायक सोनू ने गिरिडीह बनियाडीह का कबरीबाद खदान चार साल से बंद पड़ा है. जबकि ओपनकास्त खदान पिछले साल से बंद पड़ा है. लेकिन दोनों खदान बंद होने के बाद और राज्य में जेएमएम की सरकार रहते हुए वो अपनी जिम्मेवारी से दूर नहीं भागे है. लिहाजा, पिछले दो साल से दोनों खदान को सीटीओ दिलाने को लेकर दिल्ली और रांची की दौड़ लगा रहे है. और जब जाकर सीटीओ मिलने की दिशा में पहल शुरू हुआ है. लिहाजा, इसी वित्तीय साल में दोनों खदान के शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है.

खदानों के इतिहास पर फोकस

जबकि सीटीओ दिलाने को लेकर एक नहीं, बल्कि कई अड़चन था. क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने साल १९८० में अपने एक फैसले में आदेश दिया था की जो खनन एरिया जंगल इलाके में पड़ता है. वहा खनन नहीं हो सकता है. और इसी कारण राज्य वन एवम पर्यावरण मंत्रालय ने दोनों खदानों को एनवायरमेंट क्लियरेंस देने से इंकार कर दिया था. और इसी कारण केंद्र सरकार के जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से गिरिडीह के दोनों खदान को सीटीओ नहीं मिल रहा था. लिहाजा, इन दोनों खदानों के इतिहास पर फोकस किया गया. जिसमें यह बात सामने आई की गिरिडीह के दोनों खदान से १८५७ से कोयले का उत्खनन होता रहा है और इतने लंबे कालखंड में कोयला उत्खनन एनसीडीसी से लेकर ईस्टर्न रेलवे तक संभाला. इसे जुड़े तथ्य जुटाने में दो साल का वक्त लगा. जिसके आधार पर राज्य वन और पर्यावरण मंत्रालय ने एनवायरमेंट क्लियरेंस उपलब्ध कराया, और इसी के आधार पर केंद्र सरकार के जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दोनों खदानों के शुरू किए जाने से जुड़ा स्वीकृति दिया है, तो अगले कुछ दिनों में कबरीबाड़ खदान का सीटीओ डीएफओ कार्यालय से मिलने की उम्मीद बढ़ी है और अगले माह तक यह भी उम्मीद है की कबरीबाड़ खदान शुरू हो जाए.

रिपोर्ट:  दिनेश कुमार, गिरीडीह

 

 

 

Published at:20 Sep 2022 04:50 PM (IST)
Tags:News
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.