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मजदूरी मांगना पड़ा भारी! बनारस में गुमला के मजदूरों की बेरहमी से पिटाई

BY -
Varsha Varma CE
Varsha Varma CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 23, 2026, 11:48:00 AM

गुमला(GUMLA): जिले से मजदूरों के शोषण और उत्पीड़न का एक मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए गुमला के मजदूरों ने भट्ठा मालिक और एजेंट पर बंधक बनाकर रखने, मारपीट करने और महीनों की मेहनत की कमाई हड़पने का गंभीर आरोप लगाया है. पीड़ित मजदूर किसी तरह वहां से जान बचाकर गुमला लौटे और अब न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

मामला सिसई प्रखंड का बताया जा रहा है. पीड़ित मजदूरों ने श्रम विभाग गुमला में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उन्हें नौकरी और अच्छी मजदूरी का लालच देकर बनारस भेजा गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी नरक बन गई. मजदूरों का कहना है कि उनसे दिन-रात कड़ी मेहनत कराई गई, लेकिन बदले में तय मजदूरी नहीं दी गई.

पीड़ित जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में एक स्थानीय एजेंट करीब 20 मजदूरों को बनारस के “सागर ब्रिक्स” ईंट भट्ठे में काम दिलाने के नाम पर लेकर गया था. एजेंट ने हर मजदूर को 15 हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन भट्ठे पर पहुंचने के बाद उन्हें सिर्फ गुजारे के नाम पर 1500 रुपये दिए जाते थे. मजदूरों के अनुसार, जब उन्होंने मेहनताना मांगा तो भट्ठा मालिक डबलू सिंह गाली-गलौज करते हुए मारपीट पर उतर आता था.

मजदूरों ने यह भी आरोप लगाया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन मजदूरी कराई जा रही थी. लगातार हो रही प्रताड़ना और अमानवीय व्यवहार से परेशान होकर कई मजदूर वहां से भाग निकले. हालांकि जगरनाथ तुरी समेत चार मजदूर करीब छह महीने 15 दिन तक वहां फंसे रहे. अंत में भट्ठा मालिक ने उन्हें बकाया राशि दिए बिना पीटकर भगा दिया. पीड़ितों के मुताबिक, चार मजदूरों का कुल 3 लाख 90 हजार रुपये अब भी बकाया है. मजदूरों ने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा बकाया मजदूरी दिलाने की मांग की है.

इधर, सिसई के समाजसेवी संजय वर्मा ने कहा कि यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले असम में भी गुमला के मजदूरों के साथ मारपीट और शोषण की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. उन्होंने प्रशासन से मांग की कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

 

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