दुमका(DUMKA): महंगाई का असर अब बोरिंग और बोरवेल व्यवसाय पर भी साफ़ दिखाई देने लगा है. पाइप, मशीन के पार्ट्स, डीज़ल और अन्य जरूरी सामग्रियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से बोरिंग गाड़ी मालिकों की परेशानियां बढ़ गई हैं. पुराने रेट पर काम करना अब उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है.
मजदूरी देना भी बन रहा चुनौती
बोरवेल मालिकों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण न केवल मुनाफा खत्म हो रहा है, बल्कि मजदूरों को समय पर मजदूरी देना भी मुश्किल होता जा रहा है. कई मामलों में डीप बोरिंग का काम लागत से कम दर पर करना पड़ रहा था, जिससे व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है.
दिग्घी में बोरवेल मालिकों की बैठक
इन्हीं समस्याओं को लेकर दुमका के दिग्घी में सभी बोरवेल मालिकों की एक अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई और समाधान निकालने पर सहमति बनी.
डीप बोरिंग के लिए नए रेट तय
बैठक में सर्वसम्मति से डीप बोरिंग के नए रेट निर्धारित किए गए. फैसले के अनुसार, डीप बोरिंग के लिए 140 रुपये प्रति फीट की दर तय की गई है, जबकि 700 फीट से अधिक गहराई पर बोरिंग कराने के लिए 180 रुपये प्रति फीट की दर लागू होगी.
तय रेट से कम पर काम करने पर सख्ती
बोरवेल मालिकों ने यह भी निर्णय लिया कि यदि कोई बोरिंग गाड़ी मालिक तय रेट से कम कीमत पर काम करता है, तो उस पर एक लाख 51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके साथ ही संबंधित बोरिंग गाड़ी को दो दिनों तक खड़ा रखा जाएगा.
बोरवेल मालिकों ने रखी अपनी मजबूरी
बोरवेल मालिक सुनील सिंह ने बताया कि महंगाई लगातार बढ़ रही है. पाइप, मशीन के पार्ट्स और डीज़ल सभी महंगे हो चुके हैं. ऐसे में पुराने रेट पर काम करना संभव नहीं है, इसलिए सभी मालिकों ने मिलकर नए रेट तय करने का फैसला लिया है.
बोरवेल मालिकों के इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है.