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अवैध मिनरल उत्खनन करने वालों की अब खैर नहीं, माइन्स एंड मिनिरल एक्ट में संशोधन, राज्य करेगा कार्रवाई 

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 6:56:08 AM

धनबाद (DHANBAD) : देश में 95 तरह के मिनरल का उत्पादन होता है. जिसका बाजार लगभग 3 लाख करोड़ का है. लेकिन बहुत जगह यह खनन अवैध रूप से किया जाता है. जो रूकने का नाम नहीं ले रहा. माइन्स एंड मिनिरल एक्ट 1957 में संशोधन के बाद भी अवैध उत्खनन थम नहीं रहा है. एक्ट में संशोधन कर जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है. बदलाव के बाद प्रति हेक्टेयर जुर्माने की राशि 25000 से बढ़ाकर 5 लाख कर दी गई है. सजा के प्रावधान को 2 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है. साथ ही अवैध खनन से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए विशेष अदालत गठित करने का प्रावधान किया गया है. बावजूद अवैध खनन रुकता नहीं है.

माइनिंग सिस्टम का निर्माण

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2013 से 2017 के दौरान 4.16 लाख अवैध खनन के मामले सामने आए. ऐसे कई मामले भी हैं जो कहीं रजिस्टर्ड भी नहीं होते हैं. इसके बाद इस अवैध खनन की बड़ी समस्या को रोकने के लिए इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस में एक माइनिंग सिस्टम का निर्माण किया है. इस तकनीक का प्रयोग कर अवैध खनन का पता लगाकर इसकी जानकारी राज्यों को दी जाएगी. ताकि इसके खिलाफ उचित कार्रवाई हो सकें. माइनिंग सर्विलेंस सिस्टम सैटेलाइट आधारित निगरानी तंत्र है. सेटेलाइट इमेज का प्रयोग कर लीज क्षेत्र के बाहर अवैध खनन का पता लगाया जाता है. लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री प्रहलाद जोशी ने यह जानकारी दी.

राज्य को कानून बनाने का अधिकार

जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि अवैध खनन को रोकने के लिए माइन्स एंड मिनिरल एक्ट की धारा 23c के तहत कानून बनाने का अधिकार राज्यों को है. अवैध खनन इसके परिवहन, स्टोरेज पर रोक लगाने संबंधी कानून बना सकते हैं. केवल झारखंड ही नहीं ,देश में अवैध खनन बड़ी समस्या बन गई है. अवैध खनन के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है. कई नदियों सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं. कोयलांचल में कोयले का अवैध खनन हो रहा है, तो नदियों से बालू का अवैध खनन किया जा रहा है. वही, झारखंड के संथाल परगना में पहाड़ों को काटकर पत्थर की तस्करी की जा रही है. अवैध खनन को लेकर हल्ला तो होता है लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकलता .अवैध खनन करने वाले अपना काम करते रहते हैं. इस अवैध खनन से वह अपनी आर्थिक ताकत इतनी बड़ा लिए हैं कि सरकार के किसी भी कार्रवाई की दिशा मोड़ने में अपने को सक्षम पाते हैं. झारखंड में अभी अवैध उत्खनन का मामला छाया हुआ है. ईडी मामले की जांच कर रही है और पता लगा रही है कि कितने का अवैध खनन होता है और इसका लाभ किसे मिलता है.

रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद

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