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जनप्रतिनिधि का अगर क्षेत्र में जनाधार घटने लगे तो पार्टी आलाकमान भी सोचने पर मजबूर हो जाता है, शायद यही तो नही बादल के साथ हुआ

BY -
Prerna
Prerna
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:03:07 AM

TNP DESK: बादल पत्रलेख पिछले दो बार से गोड्डा लोकसभा क्षेत्र और दुमका जिले के जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. इस बार वे झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार में कृषि मंत्री बने. झारखंड में हेमंत सोरेन के जेल जाने के बाद बादल पत्रलेख फिर से चंपई सोरेन सरकार में कृषि मंत्री बने. लेकिन कोर्ट से जमानत मिलने के बाद झारखंड की सत्ता फिर से हेमंत सोरेन के पास आ गई. कल हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल विस्तार में बादल का मंत्री पद छीन लिया गया. बादल कांग्रेस कोटे से मंत्री बने थे और वे ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. यही वजह है कि उनकी जगह दीपिका पांडेय सिंह को मंत्री बनाया गया और बादल का विभाग आवंटित किया गया. बादल को मंत्रिमंडल से दरकिनार किए जाने से बाबानगरी देवघर में खूब चर्चा हो रही है. कहीं क्षेत्र में जनसमर्थन कम होने की चर्चा हो रही है तो कहीं लोकसभा चुनाव में विपक्ष को मदद पहुंचाने की चर्चा हो रही है. बादल पत्रलेख का गृह जिला देवघर के सारवां प्रखंड का कुशमाहा गांव है.

लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार बढ़त नहीं दिला पाए बादल

हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में बादल पर अपने क्षेत्र से गठबंधन प्रत्याशी को बढ़त नहीं दिलाने का आरोप है. जबकि प्रदीप यादव गठबंधन की ओर से कांग्रेस के टिकट पर भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे. संथाल से भाजपा का सफाया करने के उद्देश्य से गठबंधन के नेताओं ने क्षेत्र में कड़ी मेहनत की थी. लेकिन मंत्री रहते हुए बादल के इस क्षेत्र से निशिकांत दुबे को सबसे ज्यादा वोटों का अंतर मिला था. प्रदीप यादव को इस क्षेत्र से 62684 वोट मिले थे, जबकि निशिकांत दुबे को 44398 वोटों की बढ़त मिली थी और उन्हें 1 लाख 7082 वोट मिले थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में मंत्री बादल 44398 वोटों से पीछे रह गए. इससे पहले अगर 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो उस समय बादल विधायक थे. तब बादल इस विधानसभा क्षेत्र से करीब 50 हजार वोटों से पीछे रह गए थे. तब भी प्रदीप यादव ने गठबंधन से चुनाव लड़ा था. झाविमो के टिकट पर चुनाव लड़े प्रदीप यादव को तब भी भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दुबे ने हराया था. 2019 और 2024 में लगातार जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को बढ़त मिली. इसी वजह से लोग कयास लगा रहे हैं कि बादल हमेशा से विपक्षी प्रत्याशी की मदद करते रहे हैं, इसीलिए इस बार उनसे मंत्री पद छीन लिया गया. ऐसे में बादल का जनाधार तेजी से घटने की बात लोग सुनने लगे हैं. लोगों का मानना ​​है कि शायद यही वजह है कि आलाकमान बादल से नाराज हो गया होगा.

 

रिपोर्ट ऋतुराज सिन्हा

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