धनबाद(DHANBAD): बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया के सिद्धांत पर जीने वाले कोयलांचल में बहुत सारी चीजें हैं, जिन्हें धरोहर बनाया जा सकता है. डायमंड क्रॉसिंग को तो रेलवे ने उखाड़ दिया. रेलवे का काठ पुल भी खत्म होने के कगार पर है. बैंक मोड़ के राजेंद्र मार्केट को हेरिटेज घोषित किया गया है. मंगलवार को नगर निगम की टीम ने जिस कुएं को बैंक मोड में अतिक्रमण मुक्त कराया, उसे भी निगम हेरिटेज बनाएगा.
यह कुआं कोई साधारण नहीं है. यह अंग्रेजों के जमाने का है. 1938 में इसे खुदवाया गया था. उस समय बैंक मोड़ की आबादी बहुत कम थी. यह कुआं उस आबादी की प्यास बुझाता था. बाद में जब राजेंद्र मार्केट बना तो इसका महत्व भी बढ़ गया. धीरे-धीरे दुकानें बढ़ती गई. इलाका सघन हो गया. इस कुएं की विशेषता है कि सालों भर पानी भरा रहता है. गर्मियों में भी इससे लोग पानी निकालते हैं. पानी भरकर दुकानों तक पहुंचाने वाले कई लोगों का यह रोजगार का जरिया भी है. लेकिन अतिक्रमण कर दुकान चलाने वालों की इसपर नजर लग गई. उसके बाद तो इसको अधिक्रमित कर लिया गया और कुएं को घेरकर दुकानें चलाने जाने लगी. गनीमत है कि मंगलवार को पहुंची नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम की नजर सबसे पहले इस कुएं पर ही पड़ी और देखकर वह भी आश्चर्यचकित हुए कि कुएं को घेर कर दुकान चलाने की सोच आखिर दुकानदारों को आई कैसे. उन्हें तनिक जिम्मेवारी का बोध नहीं हुआ. धनबाद शहर में बहुत सारे ऐसे कुएं मिल जाएंगे, जो अंग्रेजों के जमाने के हैं, बहुत तो सूख गए हैं, रखरखाव के अभाव में बेकार हो गए हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बैंक मोड़ चौराहे पर निर्मित कुएं को प्रतिदिन हजारों हजार नजरें देखती थी. उस होकर लोग आते जाते थे लेकिन कुए की हालत पर किसी की नजर नहीं पड़ी. नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम जब पहुंची तो सबसे पहले उसे कुएं का अतिक्रमण ही दिखा. उसके बाद तो टीम ने सबसे पहले कुएं को अतिक्रमण मुक्त कराया.
रिपोर्ट: सत्यभूषण सिंह
