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हूल दिवस : परंपरागत पोशाक और वाद्य यंत्रों की धुन पर नाचते गाते पदयात्री हुए रवाना

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 4:03:29 AM

दुमका (DUMKA): हर साल 30 जून को हुल दिवस के रूप में मनाया जाता है. बता दें कि साल 1855 में 30 जून के दिन साहेबगंज के भोगनाडीह से हुल विद्रोह की शुरुआत हुई थी. सिदो, कान्हू, चांद, भैरव और फूलो, झानो के नेतृत्व में संथाल समाज के लोगों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया था. हुल विद्रोह ने ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला कर रख दी थी. इसकी याद में प्रत्येक साल 30 जून हुल दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस मौके पर साहिबगंज के भोगनाडीह में सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के साथ-साथ कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता है. 

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इन दिन से शुरू हो जाती है तैयारी

झारखंड की उपराजधानी दुमका में हुल दिवस की तैयारी 26 जून से ही शुरू हो जाती है. प्रत्येक वर्ष दुमका के पोखरा चौक से गोटा भरोत सिदो कान्हू फूल वैसी के बैनर तले दुमका से भोगनाडीह तक लगभग 108 किलोमीटर पदयात्रा की शुरुआत की जाती है. बीते दिन दुमका के पोखरा चौक पर स्थापित सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद पद यात्रियों को दुमका डीसी रविशंकर शुक्ला, एसपी अंबर लाकड़ा, जिला परिषद अध्यक्ष जायस बेसरा और पूर्व मंत्री लुईस मरांडी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. परंपरागत पोशाक और वाद्य यंत्रों की धुन पर नाचते गाते पदयात्री दुमका के पोखरा चौक से अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं और 30 जून को साहेबगंज के भोगनाडीह पहुंचकर सिदो कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के साथ ही पद यात्रा का समापन होता है. जगह-जगह इन पद यात्रियों को देखने के लिए काफी संख्या में लोग इकट्ठा रहते हैं.

पूर्व मंत्री लुईस मरांडी का संबोधन

पोखरा चौक पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में पूर्व मंत्री लुईस मरांडी ने कहा कि आज हम जिनको महापुरुष कह रहे हैं उन्होंने 1855 में ही ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किया था. उनका सपना था कि आने वाली पीढ़ी हर स्तर पर आगे बढ़े चाहे वह राजनीतिक क्षेत्र हो, सामाजिक क्षेत्र हो, शैक्षणिक क्षेत्र हो या आर्थिक स्तर पर समाज आगे बढ़े. उन्होंने कहा कि आज खुशी के साथ-साथ गर्व की बात है कि संथाल समाज की एक महिला देश का प्रथम नागरिक बनने जा रही है. एनडीए ने झारखंड के पूर्व राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाया है. उन्होंने कहा कि हमें आगे बढ़ने के साथ-साथ दूसरों को भी सहयोग करनी चाहिए तभी पूरा समाज आगे बढ़ेगा.

सामाजिक की कुरीतियां को नष्ट करेगा यह आदर्श

वहीं कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसपी अंबर लकड़ा ने कहा की 1855 में सिदो, कान्हू, चांद, भैरव, फूलो, झानो ने ब्रिटिश शासक के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका था जिसकी बुनियाद पर 1947 में हमारा देश आजाद हुआ. सिदो कान्हू ने जो सपना देखा था उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प हम सभी भारतवासियों को लेनी चाहिए. यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कई सामाजिक कुरीतियां है, अंधविश्वास है जिसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी. हमारे महापुरुषों ने अंग्रेजो के खिलाफ क्रांति की मशाल जलाई थी हमें अशिक्षा के खिलाफ मशाल जलाना होगा.

रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका

 

Tags:News

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