गिरिडीह(GIRIDIH): सूबे के शिक्षा मंत्री के निधन से डुमरी विधानसभा क्षेत्र में माहौल गमगीन हो गया है. लोग उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं.और अपने नेता को याद कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि, ऐसा विधायक डुमरी को कभी नहीं मिलेगा. जगरनाथ महतो में क्षेत्र में विकास करने का जज्बा था. उसी की देन है कि डुमरी विधानसभा क्षेत्र में सभी तरह का विकास संभव हो पाया.
जेएमएम के केडर से लेकर शिक्षा मंत्री के पद तक का सफर कड़ी मेहनत से तय किया
आपको बता दें कि जगरनाथ महतो झारखंड मुक्ति मोर्चा के केडर के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत विनोद बिहारी महतो के नेतृत्व में झारखंड आंदोलन के दौरान किया था. विनोद बिहारी महतो के निधन के बाद लगातार राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहे. पहली बार साल 2000 में समता पार्टी के बागी उम्मीदवार के रूप में डुमरी विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव लड़ा. और 20500 वोट हासिल किया. चुनाव में हार के बाद वो झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हुए. और साल 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में डुमरी विधानसभा क्षेत्र से भारी वोटों से बहुमत पाकर विजय हुए. इस प्रकार 2009 में वे दोबारा डुमरी विधानसभा क्षेत्र से बतौर विधायक चुने गए. तथा 2014 और 2019 में भी उनका सामना करने वाला कोई विधायक का उम्मीदवार उनके चुनावी मैदान में नहीं था, जो उन्हें हरा सके. 2014 और 2019 में भी डुमरी विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों से विजय हुए. लगातार डुमरी विधानसभा क्षेत्र से वे 4 बार विधायक बने. 2019 में जेएमएम की सरकार बनी जिसमें उन्हें बतौर स्कूली शिक्षा और मद्य निषेध मंत्री का पदभार दिया गया.
शिक्षा मंत्री का पदभार मिलने के बाद काफी सराहनीय काम किया
बतौर शिक्षा मंत्री उन्होंने झारखंड के पारा शिक्षकों के प्रति बेहतर काम किया. साथ ही शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करते रहे. वे कई सभाओं में मंत्री बनने के बाद लोगों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने और पढ़ाने के लिए अपील करते रहे. सभाओं में कहते थे कि मेरे पास दो मंत्रालय है. शिक्षा और दारू विभाग. बच्चों से कहते थे दारु पीना सीखोगे तो बर्बाद हो जाओगे और पढ़ना सीखोगे तो आबाद हो जाओगे. इसलिए पढ़ाई पर ध्यान दो और झारखंड के साथ-साथ अपने मां-बाप का नाम रोशन करो. उनके इस बात से बच्चे बहुत ही प्रभावित होते थे.बतौर विधायक उन्होंने डुमरी के नक्सल प्रभावित क्षेत्र से लेकर शहरी क्षेत्र तक भरपूर विकास का कार्य किया जिसके कारण आज डुमरी विधानसभा के हर एक गांव मोहल्ले में सड़क, बिजली, पेयजल की व्यवस्था है.
विधानसभा में 1932 को लेकर उठाते रहे आवाज
जगरनाथ महतो विधानसभा में 1932 को लेकर आवाज उठाते रहते थे. अंततः राज्य सरकार ने 1932 की खतियान व स्थानीय नीति का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने का काम किया. बीच में भाषा विभाग को भी उन्होंने सलटने का काम किया और झारखंड में हो रहे आंदोलन को भी विराम करवाया. उन्होंने डुमरी विधानसभा क्षेत्र के उन सुदूरवर्ती क्षेत्रों का विकास किया जहां आजादी के इतने वर्षों के बाद भी काम नहीं हुआ था. आज लोग उनके किए गए कार्यों को याद कर मर्माहत हैं. उनके कार्य शैली को देखते हुए ही कोई उन्हें टाइगर कहते थे तो कोई उन्हें विकास पुरुष.
रिपोर्ट: दिनेश कुमार