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बीसीसीएल की यह नई वाशरी बोकारो स्टील प्लांट को कैसे अब देगी "ताकत", पढ़िए इस रिपोर्ट में !

बीसीसीएल की यह नई वाशरी बोकारो स्टील प्लांट को कैसे अब देगी "ताकत", पढ़िए इस रिपोर्ट में !

धनबाद(DHANBAD) : बोकारो स्टील प्लांट अभी केंद्र सरकार की प्राथमिकता सूची में है. बोकारो से उत्पादन बढ़ाने के लगातार प्रयास किये जा रहे है. बोकारो स्टील प्लांट का उत्पादन बढ़ने से अधिक कोकिंग कोयले की जरूरत होगी. सेल के अंतर्गत जो कोयला खदानें हैं, उससे ऐसा नहीं लगता कि जरूरत पूरी हो सकेगी. इसके लिए कोल इंडिया की सबसे बड़ी इकाई भारत को किंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल ) को तैयार किया जा रहा है. भारत कोकिंग कोल लिमिटेड को इतना सक्षम बनाने का काम चल रहा है कि वह बोकारो स्टील प्लांट की जरूरत को पूरा कर सके. जानकारी के अनुसार बहुत जल्द ही भोजूडीह कोल वाशरी  का उद्घाटन हो सकता है. कोयला मंत्रालय ने भी इसके लिए हरी झंडी दे दी है. 

भोजूडीह कोल वाशरी नई तकनीक पर आधारित होगी 

भोजूडीह कोल वाशरी नई तकनीक पर आधारित है. इसकी लागत लगभग 304 करोड रुपए है. शून्य डिस्चार्ज के कारण बीसीसीएल का यह ग्रीन प्रोजेक्ट भी है. यहाँ से धुलाई के बाद निकले कोयले को स्टील सेक्टर को आपूर्ति की जाएगी. यह वाशरी  कोकिंग कोल के लिए है. फिलहाल बीसीसीएल टाटा की वाशरी में किराए पर लेकर कोयला वॉश कराती है. 2.5 मिलियन टन क्षमता की भोजुडीह वाशरी के शुरू होने से बीसीसीएल कि वॉश कोल की क्षमता बढ़ जाएगी. यह समूचे स्टील सेक्टर के साथ-साथ बोकारो स्टील प्लांट के लिए भी महत्वपूर्ण होगा.  क्षमता बढ़ने से बीसीसीएल की आय में भी वृद्धि होगी. 

अभी हाल ही में कोयला मंत्री आये थे बोकारो 

बता दें कि अभी-अभी केंद्रीय इस्पात मंत्री और इस विभाग के राज्य मंत्री बोकारो और धनबाद के चासनाला का दौरा कर दिल्ली लौटे है. बोकारो स्टील प्लांट से उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है. मंत्रियों ने इसकी घोषणा भी की. ऐसे में बोकारो में प्रोडक्शन बढ़ने का  दबाव कोल इंडिया पर भी पड़ने का अनुमान है. वैसे, तो कोयलांचल में सेल की भी अपनी कोयला खदानें है. लेकिन वहां जो कोयले का प्रोडक्शन होता है, उससे  बोकारो स्टील प्लांट की जरूरत पूरी होगी, इसमें संदेह है. जानकारी के अनुसार अमूमन 1.4 मिलियन टन स्टील के प्रोडक्शन के लिए एक मिलियन टन कोकिंग कोयले की जरूरत होती है. बोकारो स्टील प्लांट को विस्तार देकर 2.3 मिलियन टन उत्पादन बढ़ाना है. यानी लगभग 2 मिलियन टन कोकिंग कोल्  की आवश्यकता हो सकती है. सेल की  मौजूदा खदानों से यह संभव नहीं है. ऐसे में कोल इंडिया की ईकाई बीसीसीएल पर दबाव पड़ने का पहले से ही अनुमान लगाया जा रहा है. 

बीसीसीएल कोल इंडिया की  इकलौती कोकिंग कोल उत्पादक इकाई है
 
बीसीसीएल ही कोल इंडिया की  इकलौती कोकिंग कोल उत्पादक इकाई है. जानकारी के अनुसार वर्तमान में बोकारो स्टील प्लांट की उत्पादन क्षमता सालाना 5.25 मिलियन टन  है. विस्तारीकरण  के बाद प्रोडक्शन 7.5 मिलियन टन किया जाना है. धनबाद और बोकारो में सेल की जो खदानें हैं, उनमें दो चासनाला डीप माइंस एवं जीतपुर बंद है. चासनाला अपर सिम से सालाना एक लाख टन कोयले का उत्पादन होता है. टासरा  प्रोजेक्ट की क्षमता 3.5 मिलियन टन है. ऐसे में बीसीसीएल से कोयला लेना जरूरी हो सकता है. नहीं तो इंपोर्टेड कोयला ही विकल्प बनेगा.  बोकारो इस्पात संयंत्र की नींव 1965 में रखी गयी थी.1972 में ब्लास्ट फर्नेंस काम करने लगा. उस समय उत्पादन क्षमता 1.7 मिलियन टन थी, जो अब 5.25 मिलियन टन तक पहुंच गई है.

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  

Published at:10 Feb 2025 12:28 PM (IST)
Tags:DhanbadBCCLBSLWasheryCoking Coal
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