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कुख्यात झारखंड के जामताड़ा को कैसे मिलने जा रही नई पहचान ,पढ़िए इस रिपोर्ट में 

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 12:48:55 AM

धनबाद(DHANBAD):  झारखंड के कुख्यात जामताड़ा को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है. काम शुरू हो गया है. जामताड़ा की भौगोलिक स्थिति कोल् इंडिया को खींच कर जामताड़ा ले गई  है. अब जामताड़ा को लोग केवल साइबर अपराधियों के लिए ही नहीं, बल्कि अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट के लिए भी जानेगे.  इस प्रोजेक्ट की शुरुआत जामताड़ा में हुई है. फिलहाल यह एक पायलट प्रोजेक्ट है. इसके तहत खदान में कोयले से निकलने वाली गैसों का प्रोडक्शन होगा.  इन गैसों  का अलग-अलग इंडस्ट्री में प्रयोग किया जा सकेगा. सूत्र बताते हैं कि CMPDIL और कनाडा की कंपनी ने मिलकर इसकी शुरुआत की है. माइंस में मौजूद मीथेन , हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी  गैसों का उत्पादन किया जाएगा और जरूरत के हिसाब से अन्य उद्योगों में इसका उपयोग किया जा सकेगा.  यह एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है. 

माइंस के भीतर की गैसों का हो सकेगा दोहन 
 
ऐसा होने से कोयले की  खदान में मीथेन , हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी  गैसों का का दोहन किया जाएगा.  सूत्रों के अनुसार अंडरग्राउंड  गैसीफिकेशन का महत्व तब और अधिक बढ़ जाता है, जब पारंपरिक तरीके से कोयला निकलना आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं होता.  इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से कोल इंडिया देश-विदेश की उन अग्रणी माइनिंग कंपनियों में शामिल हो जाएगी, जिसने कोल्  गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी  को अख्तियार कर लिया है. कोयला मंत्रालय ने 2015 में ही कोयला और लिग्नाइट वाले क्षेत्रों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दे दी थी.  इसकी शुरुआत के लिए कोल इंडिया ने सबसे पहले झारखंड के जामताड़ा के नाला  प्रखंड को चुना.  भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस जगह का चयन किया गया है.  प्रोजेक्ट के पहले चरण की शुरुआत इसी महीने में हुई है.  इसमें बोर होल ड्रिलिंग के आधार पर टेक्निकल फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जाएगी. दूसरे चरण में कोल् गैसीफिकेशन के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत पर ध्यान दिया जाएगा.  देश का पहला पायलट प्रोजेक्ट जामताड़ा में शुरू होने से जामताड़ा की ख्याति  भी बढ़ेगी.  अब तक जामताड़ा साइबर अपराधियों और उनकी पाठशाला के लिए ही जाना जाता था.  

देश -दुनिया में ठगी कर रहे जामताड़ा के अपराधी 

जामताड़ा से निकले साइबर अपराधी देश के विभिन्न राज्यों में फैल गए हैं और कहीं बैठ कर कहीं के लोगों को ठग  रहे है.  अब तक जामताड़ा साइबर अपराध के लिए ही जाना जाता था ,लेकिन अब अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन के लिए भी जामताड़ा जाना जाएगा. यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि देशभर में साइबर अपराध की चर्चा जामताड़ा के बिना अधूरी मानी जाती है.  झारखंड और बंगाल के बॉर्डर पर बसा यह जिला साइबर फ्रॉड का "हॉटस्पॉट" बना हुआ है. जामताड़ा में हो रहे साइबर अपराध को लेकर देश के कई राज्यों की पुलिस परेशान है.  अभी तो हाल यह है कि  पुलिस अगर पिता को पड़कर जेल भेजती है, तो बेटा साइबर अपराध में लग जाता है. जामताड़ा में साइबर अपराध की पाठशाला भी चलती है. बकायदे  साइबर अपराध कैसे करना है, इसकी फीस लेकर ट्रेनिंग दी जाती है और फिर यहां से निकले साइबर अपराधी देश और दुनिया के लोगों को चुटकी बजाते हुए ठग  लेते है. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो 

 

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