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बोकारो मुठभेड़ कांड के बाद नक्सलियों पर पुलिस का कैसे बढ़ गया है खौफ, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 7:38:04 AM

धनबाद (DHANBAD) : बोकारो में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुए मुठभेड़ में आठ टॉप लीडर नक्सली मारे गए थे. इस घटना के बाद नक्सलियों में सुरक्षा बलों का खौफ दिखने लगा है. बोकारो  पहुंचे झारखंड के डीजीपी ने भी कहा था कि अब वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं है. झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत नक्सली सरेंडर कर मुख्य धारा में लौट जाएं अन्यथा गोली कहेंगे. इसके बाद प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन जेजेएमपी के तीन सक्रिय उग्रवादियों ने सरकार के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया है. आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों में तुलसी गंजू उर्फ विशाल जी, पलेंद्र भोक्ता उर्फ अजीत जी, प्रमोद गंजू का नाम शामिल है. अब तीनों को उग्रवादियों को सरकार के प्रावधानों के अनुसार सभी लाभ दिए जाएंगे. 

झारखंड के डीजीपी ने भी कहा था-नक्सली अब मुख्य धारा में लौट आए 
 
बताया गया कि तीनों उग्रवादी संगठन के सदस्य रह चुके है. बोकारो पहुंचे झारखंड के डीजीपी ने भी कहा था कि नक्सली अब मुख्य धारा में लौट आए अन्यथा मार दिए जाएंगे. उन्होंने कोबरा बटालियन की सराहना की थी और कहा था कि बोकारो के लुगू पहाड़ी में पदस्थापित जवानों को सारंडा में भेजा जाएगा, जो चुन चुन कर उग्रवादियों का सफाया करेंगे. बता दें कि झारखंड में नक्सली अभियान को सोमवार की सुबह एक बहुत बड़ी सफलता मिली थी. प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा का अंत कर दिया गया. सात और नक्ससली मारे गए थे. प्रयाग मांझी  सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा में भी माओवादियों का बड़ा चेहरा था. गिरिडीह का पारसनाथ और बोकारो का लुगू पहाड़ तो उसके नाम से थर-थर कंपता था.
 
प्रयाग मांझी भाकपा माओवादी केंद्रीय कमेटी का सदस्य था
  
प्रयाग मांझी भाकपा माओवादी  केंद्रीय कमेटी का सदस्य था. वह संगठन के लिए रणनीति भी बनाता था और हमले की तैयारी भी करता था. फिलहाल वह नक्सली गतिविधियों को संगठित करने में लगा हुआ था. विवेक दा धनबाद जिले के टुंडी के मानियाडीह थाना क्षेत्र का रहने वाला था. बहुत कम उम्र में ही वह संगठन में शामिल हो गया था. लेकिन उसकी सक्रियता सीमित नहीं थी. वह झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, लातेहार से लेकर बिहार, बंगाल, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ तक फैले नक्सली बेल्ट में बरसों तक सक्रिय रहा. सूत्र बताते हैं कि उसके खिलाफ केवल गिरिडीह में ही 50 से अधिक मामले दर्ज है. माओवादी संगठन में उसकी पहचान एक तेज तर्रार रणनीतिकार के रूप में थी. 

दस्ते के पास एके-47, इंसास राइफल और कई विस्फोटक मौजूद थे

उसके दस्ते के पास एके -47, इंसास राइफल और कई विस्फोटक मौजूद थे. उसके साथ 50 से अधिक नक्सली थे. महिला माओवादियों का दस्ता भी था. जो अलग-अलग इलाकों में काम करते थे. उसकी तूती कई इलाकों में बोलती थी. विवेक दा की मौत के बाद भाजपा माओवादी संगठन को तगड़ा झटका लगा है. गिरिडीह बोकारो में नक्सली गतिविधियों की कमर टूट गई है. बता दें कि सोमवार की सुबह झारखंड के बोकारो जिले में हुई भीषण मुठभेड़ में विवेक दा सहित आठ नक्सली मारे गए है. रविवार की रात से ही पुख्ता सूचना पर जवानों ने इलाके को घेर रखा था. सोमवार को तड़के मुठभेड़ शुरू हुई. दोनों तरफ से गोलियां चली . अंत में जवान नक्सलियों पर भारी पड़े और एक करोड़ रुपए का इनामी विवेक दा सहित अन्य को मार गिराया. 

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

 

Tags:DhanbadBokaroNaxsaliPoliceKhauf

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