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"कॉस्ट कटिंग" की चपेट में कैसे आ गए हैं ईसीएल के कर्मचारी ,आगे और क्या हो सकता है!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: April 8, 2026, 7:39:50 PM

धनबाद(DHANBAD): कोल् इंडिया की कई सहायक कंपनियां "कॉस्ट कटिंग" की राह पर चल पड़ी हैं.    देश और दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया की सहायक कंपनी ईसीएल  मैनेजमेंट कर्मचारियों को कंपनी की आर्थिक स्थिति के बारे में पत्र के माध्यम से जानकारी दे रहा  है.  बता दें कि ईसीएल  की वित्तीय स्थिति सही नहीं है. नियमित  वेतन भुगतान में भी परेशानी आ रही है.  वैसे तो कोल इंडिया की एक- दो को छोड़कर सभी इकाई दबाव में हैं.  लेकिन ईसीएल  ने निर्णय लिया है कि केवल लाभ वाली खदानो  के श्रमिकों को संडे और हॉलीडे दिया जाएगा। 

"कॉस्ट कटिंग " के और भी निर्णय लिए गए हैं 

 जिन कोलियरियों  का उत्पादन कम है या वह नुकसान में चल रही है, वहां यह सुविधा अब नहीं दी जाएगी।  सूत्र बता रहे हैं कि यह निर्णय इसी महीने से लागू हो गया है. धनबाद के निरसा  में  संचालित ईसीएल  की एक इकाई के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर सीएमडी  ने कई कोलियारियों के नाम गिनाये हैं.   जहां कंपनी नुकसान में है.  ऐसी  कोलियरी  में संडे और हॉलीडे नहीं देने का निर्देश दिया है.  पत्र में प्रोडक्शन  बढ़ाने को भी कहा गया है. सूत्र बताते हैं कि  कोल इंडिया की इकाई ईसीएल  की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से मैनेजमेंट कई निर्णय भी लिया है. 

कर्मचारियों के स्थानांतरण का भी निर्णय लिया जा चुका है 

 सूचना के अनुसार कुछ कर्मचारियों के तबादले का भी निर्णय लिया गया है.  वैसे भी, कोल इंडिया की सभी इकाइयों को कमर्शियल कोल्  ब्लॉक से भारी चुनौती मिल रही है.  कोल इंडिया की कोलियारियों कठिनाई झेलनी  पड़ रही है.  खरीदार कम मिल रहे हैं.  बीसीसीएल तो  कैशबैक पॉलिसी लेकर आई है.  हालांकि इस पॉलिसी का बीसीसीएल मैनेजमेंट को फायदा हो रहा है.  बता दें कि  ईसीएल  की कई कोलियारियां -एरिया  झारखंड में भी संचालित हैं  निरसा  से लेकर संथाल परगना तक ईसीएल  की कोलियारियां फैली हुई हैं. 

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

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