धनबाद(DHANBAD) | बिहार में दही -चूड़ा भोज सिर्फ भोज नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत बताने और दिखाने का एक हथियार भी है. कई लोग आपसी शिकवे दूर कर एक दूसरे के साथ होते है. पार्टी छोड़े कई लोग पार्टी में लौट आते है. कई विवाद भी सुलझ जाते है. अब आप बुधवार को लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के दही -चूड़ा भोज को ही लीजिये. लालू प्रसाद भोज में शामिल हुए, लेकिन राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव शामिल नहीं हुए. इसको लेकर भी कई बातें कहीं जा रही है. हालांकि चिराग पासवान ने कहा है कि जब घर का मुखिया ही पहुंच गया, तो बाकी लोग के पहुंचने की बात भी स्वीकार कर लेनी चाहिए. गुरुवार को चिराग पासवान ने दही -चूड़ा भोज का आयोजन किया.
इस भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा , मंत्री दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय समेत कई राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों के बड़े लोगो ने भाग लिए. अब दही -चूड़ा भोज में पुराने कड़वे रिश्ते कैसे मिठास में बदल जाते हैं, इसका उदाहरण आपको चिराग पासवान के दही -चूड़ा भोज में दिख जाएगा. बाहुबली पूर्व सांसद सूरजभान सिंह गुरुवार को चिराग पासवान के भोज में शामिल हुए. पूर्व केंद्रीय मंत्री और चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस ने भी सूरजभान सिंह के पार्टी में वापसी के संकेत दिए.
दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सूरजभान सिंह ने साथ छोड़कर राजद में शामिल हो गए थे. सूरजभान सिंह की पत्नी बीणा देवी को मोकामा विधानसभा सीट से राजद ने टिकट दिया. वहां से जदयू के टिकट पर बाहुबली अनंत सिंह चुनाव लड़ रहे थे. अनंत सिंह चुनाव जीत गए और बीणा देवी को हार मिली. अब सूरजभान सिंह के एक बार फिर वापसी के कयास लगाए जा रहे है. इस तरह की अन्य बातें भी हुई है. मतलब कहा जा सकता है कि बिहार में दही -चूड़ा भोज के बहाने कई नेता अपना ठौर -ठिकाना तलाशते है. घर बदलने की जमीन तैयार करते है. 2026 के चूड़ा -दही भोज में भी कुछ ऐसा ही दिखा है. यह अलग बात है कि यह पहला साल है, जब लालू प्रसाद यादव ने दही चूड़ा भोज का आयोजन नहीं किया. इस बार उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने पूरी तैयारी के साथ दही -चूड़ा भोज का आयोजन किया था.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
