टीएनपी डेस्क(TNP DESK):विक्रम शर्मा हत्याकांड की गुत्थी अब तक पुलिस सुलझ नहीं पाई है.हलांकि रोजाना समाचार पत्र के माध्यम से नए-नए राज खुल रहे है लेकिन पुख्ता जानकारी अब तक खुलकर सामने नहीं आ पाई है.सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसका हिसाब से पुलिस विक्रम शर्मा के छोटे भाई अरविंद शर्मा और दो शूटरों से पूछताछ रही है.जानकारी के मुताबिक विक्रम शर्मा झारखंड का हिस्ट्रीशीटर रहा है.जिसने कई दशक तकजमशेदपुर के करोबारियों और बड़े-बड़े अधिकारियों को डरा कर रंगदारी और लेवी वसूली है. हालांकी कई हत्याकांडों में नाम सामने आने के बाद उसको जेल की सजा भी हुई लेकिन उसके बाद से वो जमशेदपुर से दूर उत्तराखंड के देहरादून में रह रहा था.जहां वह अपनी पहचान छुपा कर रहा था जहां उसके पड़ोसियों को भी उसके इतिहास के बारे में कुछ भी पता नहीं था.
कई साल से स्टोन क्रशर का बिजनेस कर रहा था विक्रम शर्मा
बताया जा रहा है कि विक्रम शर्मा उत्तराखंड के देहरादून में स्टोन क्रशर का बिजनेस करता था.वह इस बिजनेस से काफी मुनाफा कमा रहा था काफी अच्छी जिंदगी जीता था, घर, गाड़ी महंगी-महंगी घड़ियां,मोबाइल सोने की चेन पहनने का शौकीन था.वह अपने पास एक लाइसेंसी रिवॉल्वर भी रखता था ताकि जरूरत पड़ने पर वह इसका इस्तेमाल कर सके.लेकिन एक बात हजम नहीं हो रही है कि जब विक्रम शर्मा जमशेदपुर का हिस्ट्रिशीटर था उसके ऊपर कई आपराधिक मामला दर्ज था, वह उत्तराखंड में छुपकर रहा था तो स्टोन क्रशर व्यवसाय का लाइसेंस कैसे उसको मिल गया वही सोचने वाली बात यह है कि उसके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर भी था फिर इसके लिए लाइसेंस कैसे जारी किया गया.यह सारे सवाल उत्तराखंड प्रशासन पर कई सवाल खड़े करते है.
अपनी पहचान छुपा कर व्हाइट कॉलर बनता था विक्रम शर्मा
सुत्रों के मुताबिक विक्रम शर्मा पिछले 10 साल से उत्तराखंड के देहरादून में एक आम जिंदगी जी रहा था, वो अपने आप को समाजसेवी दिखाता था लेकिन सवाल है कि क्या पुलिस इन सब से अंजान थी, क्या पुलिस को विक्रम शर्मा के इतिहास के बारे में कुछ भी नहीं पता था.यदी देहरादून पुलिस को विक्रम शर्मा के इतिहास की जानकारी थी तो फिर कैसे स्टोन क्रशर व्यवसाय का लाइसेंस दिया गया.कैसे उसको लाइसेंसी रिवॉल्वर रखने की अनुमति जिला प्रशासन की ओर से दी गई ये ऐसे सवाल है जो विक्रम शर्मा की मौत के बाद उठ रहे है.
इतने बड़े हिस्ट्रीशीटर को कैसे मिल गई लाइसेंसी रिवॉल्वर
विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पिस्तौल को विक्रम शर्मा ने अपनी सुरक्षा के लिए हमेशा अपने कमर में रखता था उसका लाइसेंस उधम सिंह जिला प्रशासन की ओर से मिला था.आपको बता दें कि 2014 से 2017 के बीच वो उत्तराखंड के देहरादून में रहा था जहां से झारखंड पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था.हालांकी 2021 में जब वहां जेल से छूटा तो फिर से उत्तराखंड की ओर रुख कर लिया और वहां स्टोन क्रशर का बिजनेस स्टार्ट किया.जेल से छुटने, हिस्ट्रीशीटर होने के बावजुद उसको लाइसेंसी रिवॉल्वर रखने की इजाजत दे दी गई हलांकी आम आदमी को इसके कई सैलून तक चक्कर लगाने पड़ते है.
क्या विक्रम शर्मा के इतिहास से अंजान थी देहरादून पुलिस
विक्रम शर्मा को जिस उधम सिंह नगर पुलिस ने लाइसेंसी रिवॉल्वर रखने का लाइसेंस दिया था उस पर अब संदेश जा रहा है.कई सवाल ऐसे है जो देहरादून प्रशासन की उनकी लापरवाही की ओर इशारा कर रहे है.वही विक्रम शर्मा को सपोर्ट करने की ओर इशारा करते है.जिस व्यक्ति पर 50 से अधिक अपराधिक मामले दर्ज हो, जिसमे 30 हत्याकांड के मामले हो वह जेल की सजा काट चूका हो और छुपकर किसी राज्य में रह रहा हो उस व्यक्ति को कैसे जिला प्रशासन ने अच्छा चरित्र वाला समझ कर लाइसेंसी रिवॉल्वर थमा दिया.यह जिला प्रशासन की लापरवाही थी या जानबुझकर कोई गलती की गई है यह बड़ा सवाल है.
