☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. News Update

प्रेमचंद के बाद देश के सबसे प्रभावशाली लेखकों में शुमार हैं संजीव: रविभूषण

प्रेमचंद के बाद देश के सबसे प्रभावशाली लेखकों में शुमार हैं संजीव: रविभूषण

रांची (RANCHI): प्रेमचंद के बाद देश के सबसे प्रभावी लेखकों में से एक संजीव हैं. वह हिंदी के अकेले ऐसे कथाकार हैं, जिन्होंने अपना साहित्य जितना रोशनाई से लिखा है, उतना खून और आंसू से भी लिखा है. संजीव का कथा साहित्य स्वाधीन भारत का आदमकद आईना है. उक्त बातें वरिष्ठ आलोचक-लेखक रविभूषण ने कही हैं. वो परिवर्तनकारी शक्तियां और संजीव का कथा-साहित्य विषय पर हुई संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे. इसका आयोजन प्रलेस, जलेस, जसम और इप्टा ने मिलकर डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान सभागार में किया था। कथाकार संजीव के 75 वर्ष पूरे होने पर यह सम्मान समारोह भी था.

 

विषय प्रवेश में टीआरआई के निदेशक व लेखक-कवि रणेंद्र ने कहा कि रचनात्कमकता प्रतिकूलताओं में ही पलती है। कई तरह के रोग और तकलीफों के बावजूद संजीव ने लेखन का कार्य जारी रखा, जिसके लिए सभी उनके आभारी हैं। निशांत ने कहा कि यह सबका सौभाग्य है कि संजीव जैसे कथाकार सशरीर सबके सामने उपस्थित हैं. एम जेड खान, बलभद्र, मिथिलेश. सुधीर सुमन आदि ने भी संजीव की रचनाओं पर विचार साझा किये.

कथा की जन्म कथा से संजीव ने कराया रूबरू

कथाकार संजीव ने अपनी रचनाओं के बारे में कई तरह की यादें साक्षा की. उन्होंने बताया कि अपराध कहानी लिखने के बाद पुलिस उनके पीछए पड़ी. ‘ऑपरेशन जोनाकी’ लिखते हुए वे रोए भी. यादों के बीच उन्होंने कहा कि रांची उनका मायका है. उन्होंने बताया कि दूसरों के लिए प्रेम पत्र लिखने से उन्होंने शुरुआत की, फिर नेताओं के पास जाने वाले मांगपत्र लिखे. बाद में कहानियों की तरफ रुख किया. उन्होंने लोगों से और खास कर स्त्रियों से किताबें पढ़ने की अपील की.

मॉब लिंचिंग पर चंदन पांडेय की पुस्तक ‘कीर्तिगान’ लोकार्पित

इधर, उसी सभागार में मॉब लिंचिंग पर चंदन पांडेय की पुस्तक ‘कीर्तिगान’ का विमोचन भी हुआ. पुस्तक के बारे में रविभूषण ने कहा कि यह रचना हमें इतिहास में ले जाती है और वर्तमान परिपेक्ष्य में जरूरी विमर्श को भी जन्म देती है. यह किताब इतिहासकार को, दलित विमर्श और आदिवासी विमर्श के लेखकों और पत्रकारों को जरूर पढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि उपन्यास का फलक बड़ा है और यह प्यार के पक्ष में है. इसमें इतिहास और इतिहास की राह से विचलन की भी बात है. उन्होंने लिंचिंग पर पूर्व की किताबों व आलेखों का संदर्भ दिया और कहा कि लिंचिंग गैर न्यायायिक हिंसा है, जिसे सरकारों का सपोर्ट है. उन्होंने लेखक चंदन पांडेय को बधाई दी कि वे कॉरपोरेट में काम करते हुए भी कॉरपोरेट के टूल नहीं बने हैं. लेखक चंदन पांडेय ने अपनी रचना पर चर्चा की और सभी के प्रति आभार प्रकट किया.

झारखंड/देश: अतीत और वर्तमान’ विषय पर कृति-चर्चा

मौके पर ‘झारखंड/देश: अतीत और वर्तमान’ विषय पर कृति-चर्चा का आयोजन हुआ, जिसका विषय प्रवेश कथाकार रणेंद्र ने कराया. उनके बाद महादेव टोप्पो, पंकज मित्र, अजय वर्मा, मिथिलेश, सुधीर सुमन, प्रज्ञा आदि ने ‘कीर्तिगान’ पुस्तक पर अपनी बातें रखीं.

 

Published at:18 Jul 2022 01:59 PM (IST)
Tags:News
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.