धनबाद(DHANBAD) : झामुमो के स्थापना दिवस 4 फरवरी को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन धनबाद आए थे. उन्होंने मंच से कहा था कि झारखंड सरकार ने स्थानीय उद्योगों में 75% स्थानीय लोगों को नौकरी देने का कानून बना दिया है. स्थानीय उद्योगों को 75 प्रतिशत स्थानीय को नियोजन देना ही होगा। अगर कंपनियां नहीं देती है, तो उन पर कब्जा कर लिया जाए. इस पर पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की प्रतिक्रिया आई थी. उसके बाद झारखंड के चर्चित विधायक जयराम महतो की भी प्रतिक्रिया आई है. विधायक जयराम महतो ने पूछा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी, आखिर कैसे स्थानीय लोग कब्जा कर पाएंगे। उन्होंने कहा है कि आपका यह कथन मुझे उद्वेलित कर दिया है.
विधायक जयराम महतो का ट्वीट ------
जयराम महतो ने कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी, कल धनबाद में आपके भाषण ने मुझे भी उद्वेलित कर दिया. आउटसोर्सिंग कंपनियाँ 75% स्थानीय को नौकरी नहीं देतीं, तो कब्जा कर लें. बस थोड़ा अफ़सोस है कि हम कार्यपालिका के लोग इतने कमजोर क्यों हैं ?
आम इंसान अगर अपने अधिकार के लिए आंदोलन करता है, तो आपकी पुलिस के उत्पीड़न का वह शिकार होता है. पुलिसिया जुल्म की जानकारी आपसे छुपी नहीं होगी. पिटाई भी होती है. झारखंड आंदोलन में ख़ुद मेरा परिवार इस ज़ुल्म का शिकार हो चुका है.
थाने में मामला दर्ज होता है. कोर्ट कचहरी में उलझा दिया जाता है. पुलिस किसी भी लड़ाई में आदिवासी और मूलवासी का सहयोग नहीं करती है. आपकी अपनी सरकार ने निजी क्षेत्रों में 75% नौकरी का प्रावधान किया. इस निर्णय के खिलाफ झारखंड स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, लघु उद्योग भारती, आदित्यपुर स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने माननीय झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी और न्यायालय ने अपना काम कर दिया. सरकार के निर्णय पर रोक लगा दी, जो अमूमन हमारे अधिकार से संबंधित हर मामलों में होता है. महोदय, आप हमारे अगुआ हैं, राज्य के मुख्यमंत्री हैं, उन तीनों संस्थाओं को खदेड़िये ना झारखंड से. पहले उनको बुलाया जाए, समझाया जाया नहीं माने तो आप हम सब मिलकर खदेड़ कर भगाते हैं.
नेता प्रतिपक्ष बाबू लाल मरांडी ने क्या किया था ट्वीट -----
HemantSorenJMM जी, आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्ज़े की बात कर आप आखिर किसकी आँखों में धूल झोंकना चाहते हैं? धनबाद में कोयला खनन क्षेत्रों में काम कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों में लगभग 95 प्रतिशत कार्य आज स्वचालित मशीनों के माध्यम से होता हैं. ऐसे में इन कंपनियों पर कब्ज़े से बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन का आपका दावा पूरी तरह भ्रामक है.
हेमंत जी, मैंने आपको शराब दुकानों का संचालन गरीबों, आदिवासियों के माध्यम से कराने सुझाव दिया था. अगर सचमुच आपको रोज़गार की चिंता होती, तो राज्य की लगभग 1500 शराब दुकानों का संचालन गरीब और स्थानीय लोगों को सौंपा जाता, प्रत्येक दुकान में यदि चार लोगों को भी रोज़गार मिलता, तो कम से कम 6000 परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होते. लेकिन आपने रिश्वत और कमीशन के लालच में शराब दुकानों को क्लस्टर प्रणाली में बांटकर बाहरी पूंजीपतियों के हाथों सौंप दिया. इसी तरह, बालू घाटों के संचालन को ग्राम सभा के माध्यम से कराने का सुझाव भी मैंने दिया था, ताकि स्थानीय लोगों को रोज़गार मिल सके. लेकिन इसके बजाय खनन माफिया से सांठगांठ कर बालू घाटों पर भी बाहरी लोगों को बैठा दिया गया.
यदि इन मेरे दोनों सुझावों पर ईमानदारी से अमल किया जाता, तो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग चार लाख स्थानीय लोगों को रोज़गार का लाभ मिल सकता था. पिछले छह वर्षों में आप रोज़गार सृजन के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रहे हैं. अब आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्ज़े की बातें कर आप जनता को बरगलाने और बेरोजगारों के जख्मों पर नमक रगड़ने का प्रयास कर रहे हैं.
