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हेमंत सोरेन VS बाबूलाल मरांडी: सवाल -आखिर किसकी आंखों में धूल झोंकना चाहते हैं मुख्यमंत्री!

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: February 5, 2026, 4:34:24 PM

धनबाद(DHANBAD): बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन धनबाद में थे.  उन्होंने कहा कि कोयला को लेकर दुनिया में धनबाद का अलग स्थान है.  यहां पर जितनी पब्लिक कंपनियां है, आउटसोर्स के माध्यम से यह  प्राइवेट कंपनियां बाहर से मजदूरों को लाने लगी  हैं.  उन्हें लगता है कि लोकल लोगों को रखेंगे तो आंदोलन होगा, लेकिन याद रखिएगा 75% स्थानीय को रखना ही होगा, नहीं तो अपना हक -अधिकार जरूर लिया जाएगा. यह बात उन्होंने धनबाद के गोल्फ मैदान से झारखंड मुक्ति मोर्चा के  स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह के मंच से कहीं थी.  उसके बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूछा है कि आखिर आप किसकी आंखों में धूल झोंकना चाहते हैं? धनबाद में कोयला खनन क्षेत्र में काम कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों में लगभग 95% काम  स्वचालित मशीनों के माध्यम से होता है. ऐसे में इन कंपनियों पर कब्जे से बड़े पैमान पर रोजगार सृजन का आपका दावा पूरी तरह भ्रामक है. 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ट्वीट 

 कोयला को लेकर दुनिया में धनबाद अलग स्थान रखता है.  यहां पर जितनी पब्लिक कंपनिया हैं, आउटसोर्स के माध्यम से यह प्राइवेट कंपनियां  बाहर से  मजदूर के रूप में लाने लगे हैं. उन्हें लगता है कि लोकल लोगों को रखेंगे तो आंदोलन होगा, लेकिन याद रखियेगा आपको 75% स्थानीय को रखना ही होगा, नहीं तो अपना हक-अधिकार जरूर लिया जाएगा. साथियों, एक और महत्वपूर्ण बात, बड़ी मेहनत से हमें यह राज्य मिला है, इसलिए जो झारखंड विरोधी लोग है ,उन्हें दुबारा खड़ा होने का मौका नहीं देना है.  शहर से लेकर गांव तक अब हमें एक बराबर और एक ताकत के साथ रहना है, क्योंकि गांव भी हमारा है, शहर भी हमारा है. 

नेता प्रतिपक्ष बाबू लाल मरांडी का ट्वीट 

 HemantSorenJMM जी, आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्ज़े की बात कर आप आखिर किसकी आँखों में धूल झोंकना चाहते हैं? धनबाद में कोयला खनन क्षेत्रों में काम कर रही आउटसोर्सिंग कंपनियों में लगभग 95 प्रतिशत कार्य आज स्वचालित मशीनों के माध्यम से होता हैं.  ऐसे में इन कंपनियों पर कब्ज़े से बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन का आपका दावा पूरी तरह भ्रामक है. 

हेमंत जी, मैंने आपको शराब दुकानों का संचालन गरीबों, आदिवासियों के माध्यम से कराने सुझाव दिया था.  अगर सचमुच आपको रोज़गार की चिंता होती, तो राज्य की लगभग 1500 शराब दुकानों का संचालन गरीब और स्थानीय लोगों को सौंपा जाता, प्रत्येक दुकान में यदि चार लोगों को भी रोज़गार मिलता, तो कम से कम 6000 परिवार सीधे तौर पर लाभान्वित होते. लेकिन आपने रिश्वत और कमीशन के लालच में शराब दुकानों को क्लस्टर प्रणाली में बांटकर बाहरी पूंजीपतियों के हाथों सौंप दिया. इसी  तरह, बालू घाटों के संचालन को ग्राम सभा के माध्यम से कराने का सुझाव भी मैंने दिया था, ताकि स्थानीय लोगों को रोज़गार मिल सके.  लेकिन इसके बजाय खनन माफिया से सांठगांठ कर बालू घाटों पर भी बाहरी लोगों को बैठा दिया गया. 

यदि इन मेरे दोनों सुझावों पर ईमानदारी से अमल किया जाता, तो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग चार लाख स्थानीय लोगों को रोज़गार का लाभ मिल सकता था. पिछले छह वर्षों में आप रोज़गार सृजन के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रहे हैं.  अब आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कब्ज़े की बातें कर आप जनता को बरगलाने और बेरोजगारों के जख्मों पर नमक रगड़ने का प्रयास कर रहे हैं.

Tags:DhanbadJharkhandBabulal MarandiHemant SorenSawal

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