रांची (RANCHI): झारखंड के बहुचर्चित अस्पताल रिम्स (RIMS) की लगभग 7 एकड़ अधिग्रहित जमीन की फर्जीवाड़े के जरिए खरीद-बिक्री करने के मामले में रांची एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले के दो मुख्य आरोपियों राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक की जमानत याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान, अदालत के पिछले निर्देश के आलोक में जांच एजेंसी ने केस डायरी प्रस्तुत की. कोर्ट ने अब इस केस डायरी का गहन अवलोकन करने और जमानत याचिका पर अगली बहस के लिए आगे की तारीख निर्धारित कर दी है. गौरतलब है कि हाई कोर्ट के कड़े आदेश के बाद एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले महीने ही इस जमीन घोटाले के चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
आपको बता दें, एसीबी की गिरफ्त में आए मुख्य आरोपियों में फर्जी वंशावली तैयार करने वाले कार्तिक बड़ाईक, राज किशोर बड़ाईक के अलावा चेतन कुमार और राजेश कुमार झा शामिल हैं. जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इन भू-माफियाओं ने मिलकर एक सोची-समझी साजिश रची थी. बताते चले, इन्होंने वर्ष 1964-65 में रिम्स अस्पताल के लिए अधिग्रहित की जा चुकी सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपनी निजी पारिवारिक संपत्ति घोषित कर दिया. इसके बाद आरोपियों ने शातिर तरीके से इस बेशकीमती सरकारी भूमि को निजी बिल्डरों को करीब 31 लाख रुपये में बेच डाला था. इस पूरे सिंडिकेट और जालसाजी को लेकर एसीबी ने कांड संख्या 1/2026 दर्ज कर तफ्तीश शुरू की है.
इसके साथ ही यह मामला महज कुछ लोगों की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रशासनिक मिलीभगत के भी पुख्ता सबूत मिल रहे हैं. फर्जी तरीके से वंशावली और दस्तावेज तैयार कर सरकारी जमीन बेचने के इस बड़े खेल में करीब 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी अब जांच एजेंसी के रडार पर आ चुके हैं. राजस्व विभाग और अंचल कार्यालय के इन कर्मियों पर भू-माफियाओं को गलत तरीके से मदद पहुंचाने का आरोप है. एसीबी सूत्रों का कहना है कि केस डायरी के अध्ययन और आगे की पूछताछ के बाद इस घोटाले में शामिल कई रसूखदार अधिकारियों पर भी कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.