धनबाद(DHANBAD): धनबाद में फिलहाल राजनीतिक हलचल है. पॉलीटिकल पार्टी के लोग तो जोड़ -घटाव कर ही रहे हैं, सामान्य लोग भी गुणा -भाग कर रहे हैं. यह सब हो रहा है धनबाद में नगर की सरकार के गठन के बाद. पूर्व विधायक संजीव सिंह ने बुधवार को मेयर पद की शपथ ले ली तो बाघमारा विधानसभा के लोयाबाद में रहने वाले अरुण चौहान डिप्टी मेयर बने हैं. उन्होंने 55 वार्ड पार्षदों में से 50 का समर्थन पाकर डिप्टी मेयर की कुर्सी हथिया ली है. इसके साथ ही लोयाबाद का नाम एक बार फिर धनबाद की राजनीति में ऊपर उठा है. अरुण चौहान डिप्टी मेयर बनेंगे, चुनाव के पहले किसी को इसकी उम्मीद नहीं थी. लेकिन समय ने ऐसा पलटा खाया, परिस्थितियां ऐसी बदली कि संजीव सिंह ने भी अरुण चौहान की पीठ पर हाथ रख दिया और उनकी एक तरफ़ा जीत हो गई.
योगेश बाबू के बाद उभरा है लोयाबाद से कोई दूसरा नाम
लोयाबाद कोलियरी इलाका है और यहां से बहुत पहले योगेश्वर प्रसाद योगेश राजनीति में उभरे थे. वह चतरा से सांसद भी रहे, तो बिहार सरकार में मंत्री भी थे. कांग्रेस के बड़े नेता माने जाते थे. योगेश बाबू के बाद अरुण चौहान का नाम उभरा है. यह अलग बात है कि अरुण चौहान आगे क्या कर पाएंगे, राजनीति में मिली इस उपलब्धि को कैसे आगे बढ़ाएंगे, यह सब सवालों में है. लेकिन इतना तो तय है कि लोयाबाद धनबाद की राजनीति में चर्चा में आ गया है. यह अलग बात है कि अरुण चौहान के बड़े भाई हरेंद्र चौहान झामुमो के नेता हैं और सांसद ढुल्लू महतो के राजनीतिक विरोधी हैं. इस जीत में उनकी भी भूमिका है. अब देखना है कि हरेंद्र चौहान और अरुण चौहान राजनीति में आगे कैसे बढ़ते है.
परिणाम में क्यों छुपा है एक बड़ा राजनीतिक सन्देश
बता दें कि धनबाद नगर निगम में श्रीमती इंदु देवी, शेखर अग्रवाल के बाद बुधवार को शपथ के साथ ही संजीव सिंह शहर की सरकार के मुखिया बन गए है. डिप्टी मेयर बाघमारा के हरेंद्र चौहान के भाई अरुण चौहान चुन लिए गए है. चुनाव लगभग एकतरफ़ा हुआ है. यह अलग बात है कि इसकी संभावना पहले से ही व्यक्त की जा रही थी. परिणाम भी संभावना के अनुसार ही आया है. लेकिन इस परिणाम में एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी छुपा हुआ है. जैसा कि कहां जा रहा था, धनबाद के एक बड़े नेता को "कट टू साइज" करने के लिए प्रयास चल रहा है और उसी प्रयास में अरुण चौहान आगे बढ़े हैं. अरुण चौहान को सिंह मेंशन का भी समर्थन था. संजीव सिंह भी चाहते थे कि अरुण चौहान ही डिप्टी मेयर बने और हुआ भी ऐसा ही. दरअसल, निगम चुनाव के साथ धनबाद की राजनीति घूम रही है. यह राजनीति कई कोणों को को जन्म दे रही है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो