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मात्र दस हजार के चक्कर में ढह गया इंजीनियर वीरेंद्र राम का साम्राज्य, जानिए इनकी काली कहानी के अजूबे कारनामें

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 1:40:54 PM

धनबाद (DHANBAD) : झारखंड के चर्चित अभियंता वीरेंद्र राम आज ही चर्चे में नहीं आए हैं. पहले से ही चर्चे में थे. लेकिन प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद उनकी कलई खुल गई है. सरकार अगर पहले ही एसीबी को जांच की अनुमति दे दी होती तो यह खुलासा पहले ही हो जाता. लेकिन इस बार पहुंच और पावर भी कोई काम नहीं आया. बिहार के सिवान जिले के मैरवा के मूल रूप से रहने वाले वीरेंद्र राम जितने काबिल नहीं है. उसे अधिक उन्हें जिम्मेवारी मिलती रही है, तो आखिर जिम्मेवारी देने वाले भी तो इसके लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेवार हो सकते हैं. इस अभियंता की ताकत का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि साल 2019 के विधानसभा चुनाव में वह अपनी पत्नी को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते थे लेकिन समय ने साथ नहीं दिया. और एसीबी की जांच में उनका नाम सामने आ गया और अपनी पत्नी को टिकट नहीं दिला सके. हालांकि प्रवर्तन निदेशालय ने जिस मामले को लेकर कार्रवाई की है. यह मामला ₹10,000 घुस से जुड़ा हुआ बताया जाता है.

बॉडीगार्ड चाहते थे वीरेंद्र राम 

जानकारी के अनुसार 13 नवंबर 2019 को एसीबी ने वीरेंद्र राम के मातहत जूनियर इंजीनियर सुरेश प्रसाद वर्मा को एक ठेकेदार से ₹10000 रिश्वत लेते पकड़ा था. सुरेश प्रसाद वर्मा जमशेदपुर में वीरेंद्र राम के मकान में रहते थे. एसीबी ने जब सुरेश वर्मा के ठिकानों पर छापेमारी की, तब घर से दो करोड रुपए से अधिक बरामद किए गए थे. उस समय सुरेश प्रसाद वर्मा ने  बताया था कि पैसे वीरेंद्र राम के हैं और उनके रिश्तेदार ने पैसे रखने को दिया था. इस मामले में सुरेश प्रसाद वर्मा जेल भेज दिए गए थे. एसीबी ने जब जांच का दायरा बढ़ाया तो वीरेंद्र राम की अकूत संपत्ति की जानकारी मिली. एसीबी ने इस मामले में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने को लेकर PE दर्ज करने की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी थी. लेकिन राज्य सरकार से इजाजत नहीं मिली और आय से अधिक संपत्ति की जांच नहीं हो पाई. लोग बताते हैं कि झारखंड सरकार में वीरेंद्र राम की काफी चलती थी. जो चाहते थे सो कर लेते थे. यहां तक की उन्हें सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड मुहैया कराने के लिए भी अनुशंसा की गई थी. अभी झारखंड में प्रवर्तन निदेशालय की ताबड़तोड़ कार्रवाई से भ्रष्ट अधिकारियों की नींद उड़ी हुई हैं .साहिबगंज को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय अभी जांच कर ही रहा है. अधिकारियों को समन भेजकर पूछताछ कर रहा है. बीच-बीच में छापेमारी कर बड़ी कार्रवाई भी कर रहा है. वैसे वीरेंद्र राम से जुड़े अथवा उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी अब तलवार लटकनी शुरू हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई कई राज खोल सकती है.

रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद

Tags:Anti-Corruption BureauPEengineer Virendra Ramjharkhand latest newsthe news post

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