टीएनपी (Tnp desk):-लोक आस्था का महपर्व छठ आज से नहाय-खाय के साथ देश भर में शुरु हो गया. खासकर, बिहार-झारखंड में चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व की बेहद ही अलग महत्व और श्रद्धा है. नहाय खाय के साथ पर्व की शुरुआत होती है, इस दिन लोकी की सब्जी , चने दाल और चावल छतव्रती खाकर इस पर्व की शुरुआत करते हैं. नहाय खाय से पहले कद्दू की मांग काफी बढ़ जाती है, कहीं-कहीं इसके भाव भी बढ़ जाते हैं. हालांकि, छतव्रती चाहे कितना भी महंगा हो जाए बेहद शुद्धता औऱ पवित्रता के साथ छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय में कद्दू भात खाकर ही करती है. लिहाजा, कद्दू का महत्व काफी बढ़ जाता है.
कद्दू क्यों खाया जाता ?
चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में कद्दू चावल-खाने के पीछा धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी माना जाता है. छठ व्रत रखने वाले पुरुष या महिला सात्विक खाना इस दौरान खाती हैं. दरअसल, पहले दिन खाने में ऐसी चिजों को शामिल किया जाता है, जिससे व्रत वाले दिन भूख-प्यास कम लगे. नहाय-खाय के दिन बिना प्याज- लहसून की सब्जी बनाई जाती है. इस दिन लौकी और कद्दू की सब्जी के साथ चना दाल चावल के साथ खाया जाता है. नहाय-खाय के दिन दिन खाने में ऐसी चीजों को शामिल किया जाता है, जिससे उपवास के दिन भूख-प्यास उतना नहीं लगे. नहाय खाय के दिन विशेष तौर पर लौकी और कद्दू की सब्जी बनायी जाती है. इसके साथ ही चना का दाल औऱ भात बनाया जाता है. कद्दू खाने के पीछे वजह ये भी है कि यह पचने में आसान होता है. इसके साथ ही पानी की अच्छी मात्रा भी होती है. जिससे शरीर को ताकत के साथ-साथ भरपूर विटामिन भी मिलता है.जिससे व्रत के दौरान किसी भी तरह की कमजोरी शरीर में नहीं आती है.
निर्जला उपवास में मददगार होता है कद्दू
कद्दू विटामीन से भरपूर और इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर भी जाना जाता है. छठ के दौरान जो 36 घंटे के उपवास करते हैं. लिहाजा, कद्दू में पर्याप्त मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है. जो काफी सहायता प्रदान करता है. कद्दू हमारे शरीर में शुगर लेवल को भी सही तरीके से रखता है. इससे भी छठव्रतियों का काफी मदद मिलती है. सबसे खास बात ये है इस दौरान कद्दू की पैदवार भी काफी होती है. इसलिए, सभी वर्ग के लोगों को आसानी से मिल भी जाता है.
चार दिन चलेगा महापर्व
छठ पूजा की शुरूआत नहाया-खाय के साथ शुरु होने के बाद, इस बार 18 तारीख को खरना, 19 को संध्याकालीन अर्ग और 20 तारीख को सुबह का अर्ध्य के बाद पारण होगा और इस महापर्व का समापन हो जाएगा.