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कौन हैं सिमोन उरांव, जिनसे मिलने रिम्स पहुंचे राज्यपाल रमेश बैश

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 1:40:43 AM

रांची(RANCHI): राज्य के राज्यपाल रमेश बैस शनिवार को रिम्स अस्पताल पहुंचे. रिम्स पहुंचते ही राज्यपाल रिम्स के सेकेंड फ्लोर में न्यूरोलॉजी वार्ड में गए. जहां पद्म श्री (Padma Shri) सिरोन उरांव का उलाज कर रहे डॉक्टरों से उनका स्वास्थ्य जाना और परिजनों से इलाज संबंधित जानकारी ली. खैर, अब आपके भी मन में सवाल जरूर आ रहा होगा कि सिमोन उरांव कौन हैं? कोई मंत्री है, नेता है या कोई बड़ा व्यापारी है. तो चलिए हम आपको बताते हैं कि झारखंड के वाटरमैन सिरोन उरांव  के बारे में.

सिमोन उरांव को लोग झारखंड के वाटरमैन के रूप में जानते हैं. वहीं, ग्रामीण उन्हें सिमोन बाबा के नाम से पुकारते हैं. उरांव एक पर्यवरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उन्हें वाटरमैन क्यों कहा जाता है इसके पूछे भी एक कहानी है. दरअसल, उन्होंने झारखंड राज्य में सूखे से निपटने के लिए काफी काम किया है. 

सिमोन ने सूखे से निपटने के लिए 5 सिंचाई जलाशयों के लिए मार्ग बनाया था. उन्होंने बेरो ब्लॉक में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और तालाबों की खुदाई शामिल है. इस प्रखंड में कुल 51 गांव शामिल हैं. सिमोन उरांव का जन्म 15 मई 1932 को बेड़ो ब्लॉक के एक छोटे से गांव खस्की टोली में एक कैथोलिक किसान परिवार में हुआ था. सिमोन उरांव का पूरा नाम सिमोन उरांव मिंज है. सिमोन ने महज आठवीं क्लास तक की पढ़ाई की है.  

सिमोन का समाज में योगदान
सिमोन जिस इलाके से आते हैं वहां के ज्यादातर लोग किसानी पर निर्भर रहते थे. लेकिन पानी की किल्लत की वजह से किसानों को खेती करने में काफी परेशानी होती थी और उपज भी मेहनत के अनुसार नहीं मिलता था. साल 1961 में उन्होंने अपने ग्रामीणों के साथ मिलकर पहाड़ियों की तलहटी में एक जलाशय बनाने के लिए प्रेरित किया. लेकिन उनका यह प्रयास ज्यादा दिनों तक नहीं चला और जलाशय से पानी आना बंद हो गया. जिसके बाद स्थानीय अधिकारियों की मदद से इसे फिर चालू किया गया.

पांच चेक डैम और बनाया
सिमोन उरांव ने यहां हार नहीं मानी. इसके बाद उन्होंने देशबली और झरिया में दो और बांध बनाए. वहीं, हरिहरपुर, जामटोली, खाकसिटोली, बैतोली और भसनंद के पड़ोसी गांवों में कई तालाब बनाएं. उन्होंने इस क्षेत्र में पांच चेक डैम के निर्माण में भी मदद की. आपको बता दें कि यह सारा काम उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद का किया गया है. सिमोन उरांव का प्रभाव सिर्फ झारखंड में नहीं हैं. सिमोन उरांव से प्रभावित होकर कैंब्रिज विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने हाउ टो प्रैक्टिकली कंजर्व फॉरेस्ट इन झारखंड शीर्षक पर शोध किया और डाक्टरेड की उपाधि प्राप्त की है. 

पड़हा राजा बुलाते हैं ग्रामीण
साल 1964 में ग्रामीणों ने उन्हें पड़हा राजा (जनजाति के प्रमुख) के रूप में चुना. जिसके बाद उन्होंने सामाजिक वानिकी कार्यक्रम की शुरुआत की. इस कार्यक्रम के माध्यम से वों हर साल 1000 पेड़ लगाते हैं, ताकि मिट्टी के कटाव और जल संसाधनों की कमी को रोका जा सके. सिमोन ने 25 सदस्यीय ग्राम समिति का गठन किया है, जो वानिकी अभियान का संचालन करता है.  उनके प्रयासों के बदौलत 2000 एकड़ से अधिक भूमि को खेती करने लायक बना दिया गया है. सिमोन के इलाके में एक वर्ष में तीन फसलें पैदा करने और 20,000 मिलियन टन सब्जियों की पैदावार में सहायता करने की सूचना है. इसके अलावा उन्होंने 2012-14 के दौरान प्रधान मंत्री ग्रामीण विकास फेलो के रूप में कार्य किया. 

किन-किन अवॉर्ड से किया जा चुका है सम्मानित
अमेरिकन मेडल ऑफ ऑनर लिमिटेड स्टा्राकिंग 2002 पुरस्कार के लिए चुना गया.

विकास भारती विशुनपुर से जल मित्र का सम्मान मिला.

झारखंड सरकार की तरफ से सम्मान.

भारत सरकार ने उन्हें 2016 में पद्म श्री के नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया.

Tags:News

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