धनबाद(DHANBAD): झारखंड में सरकारी स्कूल के शिक्षक अब डॉक्टरी भी करेंगे. यानी उन्हें डॉक्टर की भूमिका भी अदा करनी पड़ेगी. सुनने में यह बात अटपटा जरूर लग रही है लेकिन है 100 फीसदी सच. इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और प्रशिक्षण लेने के बाद वह स्कूल के बच्चों की आंखों की जांच करेंगे और जानेंगे कि किस बच्चे को चश्मे की जरूरत है और किसको नहीं. अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत यह पहल की गई है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने धनबाद के शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है. सिविल सर्जन के स्तर से धनबाद के डीईओ भूतनाथ रजवार को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि जिला में संचालित सभी विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं की आंखों की जांच की जानी है.
दृष्टिदोष से ग्रसित बच्चों को चश्मा मिलेगा
दृष्टिदोष से ग्रसित बच्चों को चश्मा उपलब्ध देना है. इसके लिए सभी प्रखंड से एक-एक शिक्षक को आंख की स्क्रीनिंग का प्रशिक्षण लेना है. यह प्रशिक्षण 12 अक्तूबर को सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में होगा. यहां प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षक मास्टर ट्रेनर कहलाएंगे, मास्टर ट्रेनर अपने प्रखंड के स्कूलों में एक-एक शिक्षक को प्रशिक्षण देंगे. शिक्षक अपने स्कूल के बच्चों के आंखों की स्क्रीनिंग करेंगे, इसमें जिन बच्चों में दृष्टिदोष पाया जाएगा, उनकी सूची मास्टर ट्रेनर को देंगे और मास्टर ट्रेनर उसे सिविल सर्जन कार्यालय में जमा करेंगे. इसके बाद इन बच्चों की आंखों की व्यापक जांच होगी और जरूरत के अनुसार उन्हें चश्मा प्रदान किया जाएगा.
Snellen Chart से होगी आंखों की जाँच
Snellen Chart से होगी आंखों की जाँच. यह वही चार्ट है, जिस पर लिखे शब्दों को डॉक्टर या नेत्र सहायक पढ़वाते हैं. इसके आधार पर तय किया जाता है कि लोग कितनी लाइनें साफ पढ़ पा रहे हैं और किस लाइन से उन्हें परेशानी हो रही है. शिक्षक का काम यहीं तक होगा, जांच के दौरान यदि किसी बच्चे को आठ लाइन के इस चार्ट में सातवें या उससे ऊपर के शब्दों को बताने में दिक्कत होगी तो यह माना जाएगा कि बच्चे के आंख में परेशानी ही. ऐसे बच्चों के आंखों की जांच डॉक्टर से कराई जाएगी. सातवीं लाइन तक स्पष्ट पढ़ने वालों की आंखें अच्छी मानी जाती है. शिक्षकों को निशुल्क मिलेगी ट्रेनिंग.
