धनबाद (DHANBAD) : शनिवार को कोयलांचल से लेकर संथाल परगना तक हलचल थी. धनबाद में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिसोम गुरु शिबू सोरेन थे तो संथाल परगना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह थे. दोनों जगहों से निशाना 2024 के चुनाव को साधा गया. अमित शाह ने संथाल परगना में कार्यकर्ताओं को संदेश दिया कि राजमहल लोकसभा सीट के पिछड़ने और गोड्डा संसदीय सीट के लगातार विकास की बातें लोगों तक पहुंचाई जाए. राजमहल सीट पिछली बार भाजपा हार गई थी, जबकि गोड्डा सीट से भाजपा के निशिकांत दुबे अभी सांसद हैं. अमित शाह ने यह भी कहा कि आदिवासी वोटरों को एकजुट करने के लिए काम शुरू कर दिए जाए. लगातार उनके संपर्क में रहने और भाजपा के विचारधारा से उन्हें अवगत कराने की सलाह दी.
आक्रामक दिखें पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी
संथाल परगना के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी काफी आक्रामक रहे. उन्होंने यहां तक कह दिया कि संथाल परगना से सोरेन परिवार का बोरिया बिस्तर समेट कर भेजना होगा. वरना यह लोग संथाल परगना के लोगों को ठगते रहेंगे. संथाल परगना में जो भी कार्य हुए हैं, वह केंद्र सरकार ने किया है. देवघर में यूरिया कारखाना खुलवाने का श्रेय डॉ निशिकांत दुबे को जाता है, हालांकि इसी सभा में गोड्डा सांसद ने कहा कि संथाल परगना में विकास के जितने भी कार्य हुए हैं, सबका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जाता है. सबसे बड़ी बात यह रही कि शिलान्यास कार्यक्रम से ही यह बात कही गई कि इफको कारखाने में बाबा मंदिर भी पार्टनर है. यूरिया की हर बोतल से ₹1 बाबा मंदिर को जाएगा. इस प्रकार सालाना 6 करोड बोतल के उत्पादन से हर साल बाबा मंदिर को 6 करोड़ मिलेंगे. इस राशि से बाबा मंदिर के आसपास के इलाकों का विकास होगा. गृह मंत्री के बयान के बाद ही झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने देवघर कहा कि भाजपा कुछ भी कर ले, झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन संथाल की तीनों लोकसभा सीट जीतने जा रही है. धनबाद में मुख्यमंत्री ने भाजपा को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों का हित नहीं चाहती है. जब-जब झारखंड में आदिवासी मुख्यमंत्री बने, उन्हें अपदस्थ कर दिया गया. इस बार पहली बार मूलवासी और आदिवासी की सरकार बनी है. और यह सरकार पूरी मजबूती से काम कर रही है. मूलवासी और आदिवासियों को 20 साल तक इंतजार करना पड़ा. तब जाकर उनकी सरकार बनी है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के लोगों के हित के लिए जब हम कानून बनाते हैं तो वह असंवैधानिक हो जाता है और जब यहां के लोग अपने हक हुकूक के लिए आंदोलन करते हैं तो उसे भी असंवैधानिक करार दिया जाता है. लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के लोग यह सब चीजें समझ गए हैं और अब भाजपा की दाल झारखंड में गलने वाली नहीं है. मुख्यमंत्री ने वोटरों पर पकड़ मजबूत करने के लिए बिहार, यूपी के लोगों को निशाने पर लिया. उन्होंने मंच से कहा कि वह सिर्फ झारखंड को चारागाह बना कर रखे हुए हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
रिपोर्ट : सत्यभूषण सिंह, धनबाद
