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Ghatshila By-election: झामुमो-भाजपा-जेएलकेएम का होगा लिट्मस टेस्ट, बिहार में "धोखा" के बाद क्या बदलेंगे समीकरण !

Ghatshila By-election: झामुमो-भाजपा-जेएलकेएम का होगा लिट्मस टेस्ट, बिहार में "धोखा" के बाद क्या बदलेंगे समीकरण !

धनबाद (DHANBAD) : बिहार में "धोखा" खाने के बाद झामुमो पर पूरे झारखंड की नजर टिकी हुई है. यह बात भी सच है कि घाटशिला उपचुनाव पर झारखंड मुक्ति मोर्चा फिलहाल फोकस करेगा और हर हाल में इस सीट को बड़े मार्जिन से निकालने की कोशिश करेगा. झामुमो, भाजपा और जेएलकेएम ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. अब देखना है कि फाइट सीधी होगी या त्रिकोणीय होगी.  अगर त्रिकोणीय मुकाबला हुआ तो क्या समीकरण बनेगा? इसको लेकर भी चर्चा तेज है. जेएलकेएम ने 2024 में रामदास मुर्मू पर भरोसा किया था और 2025 के उपचुनाव में भी उन्हीं पर भरोसा किया है. 2024 के विधानसभा चुनाव में रामदास मुर्मू को 8092 वोट मिले थे. एनडीए की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे रामदास सोरेन को उम्मीदवार बनाया गया है, तो झामुमो ने शिक्षा मंत्री रहे रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन को टिकट दिया है. घाटशिला सीट रामदास सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है.

घाटशिला उपचुनाव 11 नवंबर को होना है, 14 को आएगा परिणाम 
 
इस सीट पर 11 नवंबर को मतदान होना है. घाटशिला उप चुनाव के बहाने एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में जेएलकेएम ने बोकारो, रामगढ़, गोमिया, धनबाद और गिरिडीह में कई सीटों पर एनडीए का खेल बिगाड़ने में सफल रहा था. बताया जाता है कि जेएलकेएम के उम्मीदवार घाटशिला में एक कोचिंग सेंटर भी चलाते है. खैर, यह उपचुनाव महागठबंधन के लिए भी प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है, तो पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की प्रतिष्ठा भी दांव पर है. उनका राजनीतिक भविष्य भी घाटशिला उपचुनाव तय कर सकता है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के लिए भी घाटशिला उपचुनाव जीवन और मरण का प्रश्न हो सकता है.  

2014 के बाद झारखंड में पहली बार 2018 में उपचुनाव हुए

उल्लेखनीय है कि 2014 के बाद झारखंड में पहली बार 2018 में उपचुनाव हुए. गोमिया और सिल्ली  में उपचुनाव की बात कही जाती है. दरअसल, यह उपचुनाव झामुमो के दो बड़े नेता अमित महतो और योगेंद्र महतो को 2 साल से अधिक सजा होने के बाद हुई थी.  इस उप चुनाव में अमित महतो की पत्नी सीमा महतो और योगेंद्र महतो की पत्नी बबीता महतो ने जीत दर्ज की थी. फिर 2019 से 2024 के बीच 6 उपचुनाव हुए. झामुमो ने तीन, कांग्रेस ने दो और आजसू  ने एक सीट पर कब्जा किया. दुमका से बसंत सोरेन ने जीत दर्ज की थी, जबकि मधुपुर से हफीजुल अंसारी और डुमरी से स्वर्गीय जगरनाथ  महतो की पत्नी बेबी देवी ने जीत दर्ज की थी.  कांग्रेस ने मांडर और बेरमो से जीत दर्ज की.  बेरमो से कांग्रेस के  उम्मीदवार अनूप सिंह जीत हासिल की, जबकि मांडर सीट से बंधु तिर्की की बेटी शिल्पी नेहा तिर्की ने जीत दर्ज की. रामगढ़ सीट पर आजसू की ममता देवी जीती. 

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो  

Published at:21 Oct 2025 08:00 AM (IST)
Tags:DhanbadGhatshilaJharkhandBiharChunaw
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