कोडरमा (KODERMA) : चारों ओर हरियाली पहाड़ और पहाड़ों पर अठखेलियां करते बादल, और बादलों के बीच मनोरंजन करते लोग, कभी कभी मिलने वाला ये मनोरम और दिलकश नजारा कुल्लू मनाली, कश्मीर, दार्जलिंग या कोई हिल स्टेशन की नहीं है, बल्कि झारखंड के कोडरमा जिले की प्रसिद्ध ध्वजाधारी धाम की है. सावन की तीसरी सोमवारी पर पहाड़ के शिखर पर अवस्थित भोले शंकर पर जलाभिषेक के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी. यहां कुल 777 सीढियां चढ़ते हुए लोग पहाड़ पर पहुंचते हैं. प्रकृति की मनोरम वादियों और आस्था का यह संगम यूं ही नहीं लोगों को अपनी ओर खींचता है.

मनोरम वातावरण
मान्यता के अनुसार भले ही यहां भक्त भगवान शिवजी की आराधना करने आते है, जहां शादीशुदा जोड़े अपने मंगल जीवन की कामना और कुमारी बालिकाएं अच्छे वर की कामना के लिए आती हो, लेकिन साथ ही साथ इस मनोरम और दिलकश नजारे लोगों को और भी रोमांचित कर जाती है. वहीं पहाड़ पर बंदरों की टोली अपने चहल कदमी से श्रद्धालुओं को मनोरंजन भी कराती है. इधर श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से भगवान भोले पर जल के अलावा अक्षत, रोड़ी, भांग, धतूरा, बेल पत्र, पुष्प फल, नारियल आदि चढ़ाकर पूजा संपन्न करते है और अपनी मनोकामना मांगते है.
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मान्यता है कि...
शिव के इस धाम की मान्यता है कि जो भी भक्त 777 सीढ़ियां चढ़कर शिवलिंग पर जलाभिषेक करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है. शायद यही कारण है कि भक्तों की आस्था इस धाम पर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. आस्था के बढ़ने से भीड़ पर नियंत्रण और सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन के बल हर वक्त तैनात होते हैं. बता दें कि कोडरमा का विख्यात कांवर पर यात्रा का आयोजन अंतिम सोमवारी को झरना कुंड से जल उठा कर हजारों भक्त इसी ध्वजाधारी धाम पर जलाभिषेक करते हैं. जिसका शिवभक्त बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.
रिपोर्ट: अमित कुमार, कोडरमा
