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जमशेदपुर के इस बगिया को है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के सीएम हेमंत सोरेन का इंतजार, जानिए क्या है इस फूलों की बगिया की कहानी

जमशेदपुर के इस बगिया को है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य के सीएम  हेमंत सोरेन का इंतजार, जानिए क्या है इस फूलों की बगिया की कहानी

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : जमशेदपुर शहर में मानगो डिमना रोड स्थित एक अपार्टमेंट में रहने वाली गीता शुक्ला उनके पति और बेटे मिलकर एक अनोखी पहल की है. पांच मंजिला फ्लैट में रहने वाली गीता शुक्ला ने अपने पूरे घर के साथ छत को फूलों की बगिया में तब्दील कर दिया है. इस बगिया में सैकड़ों प्रकार के रंग बिरंगे फूल और कई पौधे इस बगिया की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं, इतना ही नहीं आसपास के लोग छुट्टियां मनाने इनके छत पर आकर इस बगिया का आनंद लेते हैं. गीता शुक्ला अपने परिवार की तरह हर एक फूल हर एक पौधे से बात करती है और इनकी देखरेख करती है जिस तरह छोटे-छोटे बच्चों को समय-समय पर नहलाना खिलाना प्यार करना उसी तरह गीता शुक्ला इन रंग बिरंगे फूलों को और पौधों को समय-समय पर नहलाना खिलाना और उनके पुराने फूलों को हटाकर नए फूल प्यार करवाना का काम करती है. हालांकि जमशेदपुर शहर में इनके फूल के बगिया की चर्चा खूब हो रही है. कई बार इनको अवार्ड भी मिला है. मगर इनका सपना है कि एक बार जरूर इन केस बगिया को देखने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और देश के मुख्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे.

पीएम और सीएम से मिली प्रेरणा 

गीता शुक्ला का कहना है कि जहां राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए एक पौधे पर 5 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा की थी, तो वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कभी प्रेम पौधे और फूलों में ज्यादातर रहता है. उनसे प्रेरणा लेकर मैंने भी इसकी शुरुआत की है. हालांकि हमारे आसपास भगवान या खाली जमीन नहीं था जिसकी वजह से मैंने अपने छत को ही फूलों की बगिया बना दी.

गीता बनी मिसाल 

गीता शुक्ला ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए एक अलग मिसाल कायम की है. जहां अपने पूरे घर को किचन हो या बैडरूम, हॉल या बालकनी समेत छत को पार्क में तब्दील कर दिया है. फूलों की बगिया में वेस्टज टोकरी, पुरानी साइकिल, पुराना पिंजड़ा, पुराना मिट्टी के हड्डी हर चीजों में रंग बिरंगे फूल लोगों के बीच सेल्फी प्वाइंट बने हुए हैं. गीता शुक्ला ने कहा कि हमारा उद्देश्य यह है कि हमारी जहां भी नजर पड़े वह खूबसूरत दिखे हमारा देश सोने की चिड़िया है और इस चिड़िया का सबसे अहम पाठ पर्यावरण पर्यावरण को बचाना और हरा भरा रखना कर्तव्य है. जिसको लेकर इन्होंने एक पहल शुरू की है. अपने घर से लेकर छत तक इसकी शुरुआत की है, यह रंग बिरंगी फूल नजरों को सुकून तो देता ही है, मन को भी काफी सुकून देता है, आसपास के लोग भी यहां पहुंचते हैं और अपने मन को शांत करते हैं और फूलों से प्रेम तो सबको रहता है.

पति ने भी दिया साथ

इस फूलों की बगिया में एक रोल गीता शुक्ला के पति का भी है. जो कंपनी में काम करने के बावजूद भी वह अपने बगिया को सजाने और संवारने में लगे रहते हैं उनका कहना है कि जो भी टेंशन और मानसिक रूप से परेशान होने के बावजूद इस बगिया में काम करते ही वह सब परेशानी खत्म हो जाती है और अपने बच्चों की तरह इन फूलों की देखरेख कर मन को शांति मिलती है. कई बार तो रात के समय जब हम सोते हैं तो लगता है कि इन फूलों को ठंड लगती होगी तो हम छत पर आकर इन्हें चादर भी उड़ा देते हैं. बस हमारे आसपास के लोग भी इस बगिया को काफी पसंद करते हैं. कई लोग तो दूर दरार से हमारे इस बगिया को देखने आते हैं. कई बार हमें अवार्ड मिला है. हालांकि हमारा बस एक ही अब सपना है जो देश के प्रधानमंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री इस बगिया को जरूर एक बार आकर देखें और इसे देख अन्य लोग भी अपने आसपास के क्षेत्र को सजा सवार कर पर्यावरण को मजबूत करें. उन्होंने कहा कि हस्बैंड और वाइफ दोपहिया के समान होती है, हम दोनों के सहयोग से आज इस बगिया की खूबसूरती पूरे शहर में बिखर रही है. हमारे इस बगिया में 110 कलर के अलग-अलग फूल और लगभग 50 अलग-अलग पौधे इस बगिया की खूबसूरती बढ़ाते हैं. 

पर्यावरण की तरफ युवा भी हो जागरूक 

वहीं एक तरफ जहां युवा पीढ़ी पढ़ाई के साथ जॉब का टेंशन और दूसरी तरफ सोशल मीडिया और खेलकूद ने युवा व्यस्त रहते हैं. पर्यावरण के प्रति उन्हें जागरूक करने के लिए गीता शुक्ला के बेटे भी एक पहल कर रहे हैं. उनका कहना है कि आज के बच्चे फूल पौधों को छोड़ मोबाइल और सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं. मगर मैं अपने मां और पिता अभियान में जोड़कर अपने पर्यावरण और हरियाली को बढ़ावा देता हूं. सच में अपने घर के साथ छत पर जाकर कितने भी परेशानी हो वह छूमंतर हो जाती है. अभी युवा पढ़ाई और नौकरी के प्रेशर के चलते कई गलत काम कर लेते हैं, मगर इस जगह अपने घर में एक छोटे से बगिया लगाने से वर्क प्रेशर खत्म हो जाता है. मैं युवाओं से भी अपील करना चाहूंगा कि इस तरह अपने आसपास अगर आप फूलों की बगिया या पौधा लगाते हैं तो कहीं ना कहीं दिन भर का प्रेशर खत्म हो जाता है. मेरी मां 5 वे फ्लोर पर बगानी करती तो मैं नीचे से मिट्टी लाना गमले लाना छोटा-छोटा सहयोग करता हूं.

चर्चा का विषय बना बागिचा

जमशेदपुर शहर की इस बगिया की चर्चा ना केवल जमशेदपुर शहर में है, बल्कि आसपास के जिलों में भी इस बगिया को देख लोग काफी आकर्षित हो रहे हैं. जहां लोग अपनी छुट्टियां मनाने उनके बगिया में पहुंच रहे हैं और खूबसूरत रंग बिरंगे फूलों के साथ सेल्फी खिंचवा रहे हैं. हालांकि गीता शुक्ला ने पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए एक मिसाल कायम किया है. तो वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल को बढ़ावा देते हुए अन्य लोगों से भी अपने देश में पर्यावरण को बढ़ावा के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है. हालांकि अब देखना यह है कि क्या इन गीता शुक्ला के इस बगिया को और बढ़ावा मिलेगा और राज्य के मुख्यमंत्री या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यंहा पहुंचेंगे.

रिपोर्ट : रंजीत कुमार ओझा, जमशेदपुर 

Published at:21 Feb 2023 12:36 PM (IST)
Tags:JamshedpurPrime Minister Narendra ModiCM Hemant Sorenflower gardenthe news postjharkhand latest news
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