धनबाद(DHANBAD): उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बहुबलियो के खिलाफ कोई भी कार्रवाई होती है अथवा न्यायालय का फैसला आता है या पुलिस का शिकंजा कसता है तो उसकी चर्चा कोयलांचल में शुरू हो जाती है. हो भी क्यों नहीं, पूर्वांचल के बाहुबली यों का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध कोयलांचल से जोड़ा जाता रहा है. ताजा मामला है बाहुबली मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को न्यायालय से मिली सजा का. मुख्तार अंसारी को 10 साल की सजा हुई है जबकि उसके भाई अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा हुई है. अफजाल अंसारी फिलहाल सांसद हैं,इसके बाद सांसदी भी चली जाएगी. पूर्वांचल में किसी भी गतिविधि के बाद कोयलांचल के बेताज बादशाह रहे सूर्यदेव सिंह सिंह के बड़े बेटे राजीव रंजन सिंह के लापता होने की कहानी की चर्चा शुरू हो जाती है. प्रमोद सिंह की हत्या के बाद से ही राजीव रंजन सिंह लापता है. प्रमोद सिंह की हत्या 30 अक्टूबर 2003 में कर दी गई थी. संभवत अब वह इस दुनिया में नहीं है बावजूद चूकी उनकी लाश नहीं मिली है, इसलिए उन्हें लापता ही माना जाता रहा है. प्रमोद सिंह बाहुबली ब्रजेश सिंह के सम्बन्धी थे. कोयल किंग सुरेश सिंह का कोयला का कारोबार उत्तर प्रदेश में देखते थे.
प्रमोद सिंह की हत्या के बाद लापता है राजीव रंजन सिंह
कहा जाता है कि ब्रजेश सिंह को यह सूचना दी गई कि प्रमोद सिंह की हत्या में राजीव रंजन सिंह का हाथ है. उसके बाद वह धनबाद से कोलकाता के लिए निकले लेकिन उसके बाद वापस लौट कर नहीं आये. वह कैसे लापता हुए, किसने उनको लापता कराया, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है. इधर पूर्वांचल की बात करें तो मुन्ना बजरंगी, मुख्तार अंसारी , ब्रजेश सिंह में अदावत चलती रही है. मुन्ना बजरंगी तो फिलहाल इस दुनिया में नहीं है,उत्तर प्रदेश के बाँदा जेल में 2018 में उसकी हत्या जेल में बंद अपराधियों ने कर दी. मुख्तार अंसारी को सजा हुई है, अभी वह बांदा जेल में बंद है. ब्रजेश सिंह के बारे में कहा जाता है कि कुछ साल पहले वह यूपी से जाकर ओडिसा में कंस्ट्रक्शन का काम कर रहा था. पुलिस के पास उसका कोई ठोस पहचान नहीं था. इस वजह से भी वह हमेशा पुलिस के चंगुल से बचता रहा लेकिन चर्चा है कि उसकी पहचान कराने में सूर्यदेव सिंह के बेटे संजीव सिंह ने भूमिका निभाई. इससे संबंधित एक मुकदमा भी दिल्ली के किसी थाने में दर्ज हुआ था. उसके बाद एसटीएफ की टीम ओडिसा पहुंची और ब्रजेश सिंह जैसे ही अपने आवास से निकल रहा था, एसटीएफ की टीम ने धर दबोचा और उसे दिल्ली ले कर चली गई. इस घटना को भी राजीव रंजन सिंह के लापता के मामले से जोड़कर देखा जाता है. कोयलांचल में कुछ साल पहले तक जब रैक से कोयला लोडिंग को लेकर वर्चस्व की लड़ाई चलती थी, उस समय कई ध्रुव यहां काम करते थे. कुछ लोग ब्रजेश सिंह के समर्थक थे तो कुछ मुख्तार अंसारी के तो कई मुन्ना बजरंगी के.
उत्तर प्रदेश के शूटर कोयलांचल में करते रहे है मर्डर
हत्याएं भी उन्हीं के शूटरों से कोयलांचल में कराइ जाती रही है. मुख्तार अंसारी को भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में सजा हुई है. कृष्णानंद राय की भी हत्या अत्याधुनिक हथियारों से की गई थी. सैकड़ों राउंड फायरिंग कर उनके साथ-साथ सात लोगों को मार दिया गया था. यह हत्याकांड 2007 में हुआ था. कृष्णानंद राय के बारे में कोयलांचल में जो चर्चाएं चलती रही हैं, उन के अनुसार धनबाद कोयलांचल से सिंह मेन्शन के जरिये रैक से जाने वाले कोयले का काम भी वह यदा-कदा देखते थे. इस वजह से उनका भी जुड़ाव कोयलांचल से कहा जाता रहा है. यह भी कहा जाता है कि इसी क्रम में उनकी हत्या हुई. रैक से कोयला ले जाने में धनबाद के बाहुबली रंगदारी वसूलते थे और संरक्षण के लिए पूर्वांचल के बाहुबलियों की शरण में जाते थे. यहाँ के कोयले की यूपी में अच्छी मार्केटिंग होती थी. इस वजह से कोयलांचल को लेकर पूर्वांचल में भी मारकाट चलती रहती थी.
सूर्यदेव सिंह जब तक जीवित रहे बाहर के बहुबलियो को ताकने की हिम्मत नहीं हुई
यहां यह कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि जब तक सूर्यदेव सिंह जीवित रहे(निधन 1991 ) तब तक बाहर के किसी भी बाहुबली को साहस नहीं हुआ कि कोयलांचल की ओर नजर उठा कर देख सकें, लेकिन उनके निधन के बाद 'माफिया के यूथ विंग' अपनी सुरक्षा के लिए ही सही, कारोबार में दबंग ता के लिए भी कहा जा सकता है, उनकी शरण में गए और यूपी के बहुबलियो को घर बैठे जब रंगदारी की राशि मिलने लगी तो उनकी ललक कोयलांचल की तरफ बढ़ी , यही कारण है कि कोयलांचल पूर्वांचल के बहुबलियो की गतिविधियों से प्रभावित होता रहा है. एक समय था जब रैक से कोयला लोडिंग को लेकर सिंह मेनशन और सुरेश सिंह आपस में टकराते रहते थे. सुरेश सिंह को कोयलांचल का "कोयला किंग" कहा जाता था. लेकिन सुरेश सिंह की हत्या शहर के धनबाद क्लब में 7 दिसम्बर 2011 को उस समय कर दी गई, जब वह शादी समारोह में शामिल होने गए थे. हत्या का आरोप रामधीर सिंह के बेटे शशि सिंह पर लगा. उसके बाद से ही शशि सिंह ने धनबाद छोड़ दिया है. पुलिस अभी तक नहीं खोज पाई है.
रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो
