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"गैंग्स ऑफ़ जामताड़ा" : अब टीचर भर्ती के नाम पर क्या है उनका नया पैंतरा, पढ़िए इस रिपोर्ट में !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 5:44:42 AM

धनबाद(DHANBAD) : वाह रे - साइबर अपराधियों का संगठित गिरोह. बेखौफ होकर  किसी को भी कहीं से ठगने की कोशिश शुरू कर देते है. सूचना तंत्र इतना अधिक मजबूत है कि किसी भी सूचना की जानकारी उन तक रहती है. झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी सम्मान योजना में भी फर्जीवाडा की सूचना पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लोगों से अपील करनी पड़ी है कि वह किसी से अपना ओटीपी या बैंक खाते का विवरण साझा नहीं करे.  इधर, धनबाद में एक नए तरह की ठगी की शुरुआत हुई है. साइबर अपराधी यह सूचना प्रसारित कर रहे हैं कि डेढ़ लाख दो, शिक्षक की नौकरी दिला देंगे. आगे कहते हैं कि आपकी पत्नी ने वर्ष 2015-16 में शिक्षक नियुक्ति के लिए आवेदन किया था. 
 
डेढ़ लाख अभी दीजिए, 10 मिनट में बताइए, इसके बाद काम हो जाएगा
 
कुछ पद अभी भी खाली है.  डेढ़ लाख अभी दीजिए, 10 मिनट में बताइए, इसके बाद काम हो जाएगा. फोन करने वाला अभ्यर्थी के बारे में पूरी जानकारी बताता है. यानी नियुक्ति के नाम पर भी अब ठगी शुरू हो गई है. धनबाद समेत झारखंड के विभिन्न जिलों में वर्ष 15-16 में हुई शिक्षक नियुक्ति के बाद बची हुई सीटों पर नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. धनबाद के कई लोगों से चतरा समेत अन्य जिलों में शिक्षक नियुक्ति के नाम पर फोन पर पैसे मांगे जा रहे है. धनबाद के कम से कम दो-तीन लोगों को फोन आने की पुष्टि हुई है. यह लोग तो साइबर अपराधियों के झांसे में नहीं आये और संघ प्रतिनिधियों को इसकी सूचना दी. महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि फोन करने वाला व्यक्ति खुद को शिक्षा विभाग का कंप्यूटर ऑपरेटर बताता है. वह आवेदन को पढ़कर सुनाता है. यानी आवेदक का नाम, पता, डिग्री, जन्मतिथि समेत अन्य जानकारी भी देता है.  

सभी जानकारी सुनने के बाद कोई भी आश्चर्य में पड़ जाता है

आवेदन में दी गई सभी जानकारी सुनने के बाद कोई भी आश्चर्य में पड़ जाता है. कई लोग तो सही मान लेते हैं तो कई लोग ऐसे साइबर फ्रॉड ही मानते है. सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर आवेदन की जानकारी साइबर फ्रॉड करने वालों के पास कैसे पहुंच रही है. यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है. कहते हैं कि  पुलिस डाल-डाल तो साइबर अपराधी पात-पात रहते हैं.  कभी पुलिस अधिकारी बन जाते हैं, तो कभी कस्टम अधिकारी बन जाते हैं, तो कभी आयकर के अधिकारी बन जाते है. कभी दूर संचार विभाग के अधिकारी बन ठगी करते है. कभी नियोक्ता बन जाते हैं, कभी इंडियन आयल के अधिकारी बन जाते है. ऐसा कर लोगों को ठग रहे है. धनबाद को साइबर अपराधियों ने एक तरह से अपना ठिकाना बना लिया है.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो  

Tags:DhanbadCyberCriminalsTeacherThagi

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