धनबाद (DHANBAD): एक तो मौसम की बेरुखी से धनबाद के किसान परेशान हैं. खेत खाली पड़े हुए हैं, बिचड़े भी तैयार हैं, लेकिन पानी की कमी से बुआई नहीं हो रही है. ऊपर से मकई आदि की जो फसलें किसान लगाए हुए हैं, उन्हें हाथी बर्बाद कर रहे हैं. यह हाल है टुंडी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का. ग्रामीण करें भी तो क्या करें. हाथियों का झुंड उन्हें परेशान किए हुए है. वन विभाग ग्रामीणों को हाथियों के भय से मुक्त नहीं करा पा रहा है. हाथियों के झुंड ने मंगलवार की देर शाम बांधडीह के आधा दर्जन किसानों को भारी क्षति पहुंचाई है.
मकई के खेतो में पहुंच जा रहा झुंड
खेतों में खड़े मकई के फसल को जितना खा पाया खाए, बाकी पैरों से रौंद डाले. ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने मशालचियो के सहयोग से गिरिडीह इलाके में हाथियों के झुंड को खदेड़ दिया. लेकिन हाथी चले तो जाते हैंफिर लौट आते हैं और तबाही मचाते रहते हैं. बता दें कि टुंडी प्रखंड के जोंडरा पहाड़ी गांव में शनिवार की देर रात को हाथियों के झुंड ने तबाही मचाई थी. कई घरों को तोड़ दिया. लोगों ने बताया कि पानामुनी देवी का कच्चा मकान हाथियों ने तोड़ डाला और घर में रखे अनाज को खा गए. शोर मचाने पर हाथी पहाड़ी की ओर चले गए.
झारखंड में हाथियों से नुकसान के आंकड़े
झारखंड में हाथियों के कारण हर वर्ष ग्रामीणों को जान गंवानी पड़ती है. 2021 में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक गत 11 साल में लगभग 800 लोगों की मौत हाथियों के कारण हुई है. पिछले आठ साल में विभिन्न कारणों से 60 हाथियों की मौत हो चुकी है. पांच हाथियों को तस्करों ने मार डाला, ट्रेन दुर्घटना से चार हाथियों, बीमारी से पांच हाथियों और आठ हाथी की मौत विभिन्न हादसों में हुई. जबकि एक हाथी को वन विभाग के आदेश के बाद 2017-18 में मारा गया था. 14 हाथियों की अप्राकृतिक मौत हुई है. आठ हाथियों की मौत अधिक उम्र हो जाने के कारण हुई है.
