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जनसंघ से भाजपा तक: बिहार भाजपा के भीष्मपितामह कैलाश पति मिश्र से भी कैसे आगे निकल गए नितिन नवीन!

जनसंघ से भाजपा तक: बिहार भाजपा के भीष्मपितामह कैलाश पति मिश्र से भी कैसे आगे निकल गए नितिन नवीन!

धनबाद(DHANBAD):  बिहार के भाजपा नेता नितिन नवीन  रातो रात राष्ट्रीय फलक पर छा गए है.  बिहार से राष्ट्रीय कमेटी में तो कई नेता हुए, लेकिन इतनी ऊंचाई तक कोई नहीं पहुंच पाया.  यहां तक की कैलाशपति मिश्र भी नहीं , जो कि  भाजपा के मजबूत संगठनकर्ता  माने जाते थे.  वह भी नहीं पहुंचे थे, वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद तक पहुंचे थे.  सुशील कुमार मोदी भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक ही  पहुंच पाए.  इधर, स्थिति यह है कि कल तक जो भी बिहार के भाजपा नेता नितिन नवीन के  साथ थे ,समक क्ष  थे ,आज उनके स्वागत के लिए लाइन लगाए हुए थे.  दरअसल, माना यह जा रहा है कि जेपी नड्डा के बाद नितिन नवीन ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे.  आज पटना में विधायक और मंत्रियों में  नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर  गौरव का भाव दिखा.  नितिन नवीन भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में बिहार से लंबी छलांग  लगाई है. 

नितिन नवीन को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में देखा जा रहा है 
 
पार्टी की परिपाटी के अनुसार उन्हें संभावित राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर देखा जा रहा है.  वैसे तो भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा की राजनीति भी बिहार से ही शुरू हुई थी, लेकिन वह मूल निवासी हिमाचल प्रदेश के है.  इस तरह बिहार बीजेपी से किसी नेता को पहली बार संगठन में इतने बड़े पद  की जिम्मेदारी मिली है.   बिहार और झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है.  नितिन नवीन को पद मिलना, इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है.  बंगाल में बड़ी संख्या में बिहार के लोग  है.  देखना दिलचस्प होगा कि 20 26 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत होती है या तृणमूल सरकार रिपीट करती है.  वैसे बंगाल चुनाव में अभी समय है, लेकिन रस्साकशी  शुरू हो गई है.  भाजपा हर हाल में सरकार बनाने की कोशिश अभी से ही करने लगी है तो त्रिमूल कांग्रेस भी अपनी सरकार को रिपीट कराने  की जुगत में लगी हुई है. 

आइये जानते है भाजपा के भीष्मपितामह कैलाश पति मिश्र के बारे में

आइये जानते है भाजपा के भीष्मपितामह कैलाश पति मिश्र के बारे में. कैलाश पति मिश्र ने 1971 के लोकसभा चुनाव में जनसंघ के टिकट पर पटना से चुनाव लड़ा था , लेकिन हार गए.  उन्होंने 1977 में बिक्रम सीट से बिहार विधानसभा चुनाव जीता और कर्पूरी ठाकुर की जनता पार्टी सरकार में वित्त मंत्री नियुक्त हुए.  1980 में, जब भाजपा की स्थापना हुई, तो वे इसके पहले बिहार अध्यक्ष बने.  उन्होंने 1995 से 2003 तक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया.   उन्हें 2003 में गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया और तत्कालीन राज्यपाल निर्मल चंद्र जैन के निधन के बाद वे थोड़े समय के लिए राजस्थान के कार्यवाहक राज्यपाल भी रहे.   2004 के चुनावों में भाजपा सरकार की हार के बाद, कांग्रेस सरकार ने उन्हें  राज्यपाल पद से हटा दिया था. बिहार में भारतीय जनता पार्टी के भीष्म पितामह के रूप में जाने जाने वाले कैलाश पति मिश्र , वृद्धावस्था के कारण अपने जीवन के अंतिम दो वर्षों में प्रत्यक्ष राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे, लेकिन पार्टी के लिए प्रेरणा के स्रोत बने रहे.   जेपी के 1974 के कांग्रेस विरोधी आंदोलनों में उनकी भागीदारी के कारण समाजवादियों द्वारा भी उन्हें पसंद किया जाता था. 1923 में बिहार के बक्सर में जन्मे मिश्रा जीवन भर अविवाहित रहे.  भारतीय सरकार ने 2016 में उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया था.

रिपोर्ट -धनबाद ब्यूरो

Published at:15 Dec 2025 11:04 AM (IST)
Tags:DhanbadBiharBJPNetaPad
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