चाइबासा (CHAIBASA): पश्चिमी सिंहभूम के टोंटो थाना क्षेत्र स्थित रूटुगुटू जंगल में मुठभेड़ में मारा गया नक्सली इस्माइल पूर्ति उर्फ अमृत कभी गांव के स्कूल में पढ़ने वाला मासूम बच्चा था. उसकी कहानी जंगलों में भटके एक ऐसे जीवन की दास्तान है, जिसे बचपन में ही बंदूक की राह पर धकेल दिया गया. वर्ष 2010 में जब इस्माइल महज 8 साल का था, तब कुख्यात नक्सली नेता सागेन अंगरिया उसे जबरन अपने साथ ले गया था. उस समय सांगाजाटा और आसपास के गांवों से कई बच्चों को इसी तरह संगठन में शामिल किया गया था. इस्माइल उस वक्त गांव के स्कूल में पांचवीं कक्षा का छात्र था. संगठन में जाने के बाद शुरुआती कुछ वर्षों तक वह चोरी-छिपे घर आया करता था, लेकिन धीरे-धीरे संगठन की पकड़ उस पर मजबूत होती गई. वर्ष 2018 में जब ग्रामीणों ने नक्सलियों के खिलाफ मोर्चा खोला और सामाजिक बहिष्कार शुरू किया, तब इस्माइल ने गांव लौटना पूरी तरह बंद कर दिया. पिछले आठ वर्षों से माता-पिता और परिजन उसकी एक झलक पाने को तरसते रह हैं. परिवार वाले अब उसकी लाश घर आने का इंतजार कर रहे है.
कई खूनी वारदातों में शामिल था इस्माइल पूर्ति
मुठभेड़ में मारा गया नक्सली इस्माइल पूर्ति उर्फ अमृत जराइकेला प्रखंड के सांगाजाटा गांव का निवासी था. वह कुख्यात नक्सली सागेन अंगरिया के दस्ते का सक्रिय सदस्य माना जाता था. कई संगीन घटनाओं में उसकी संलिप्तता सामने आई थी. इस्माइल पर अगस्त 2023 में तुम्बाहाका जंगल में झारखंड जगुआर के एक अधिकारी की हत्या में शामिल होने का आरोप था. इसके अलावा सितंबर 2023 में सरजोमबुरु क्षेत्र में हुए विस्फोटक हमले में भी उसका नाम सामने आया था. इस घटना में कोबरा बटालियन के जवान शहीद हुए थे. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, मुखबिरी के शक में ग्रामीण रांदो सुरीन और सुपाय मुटकुन की गला रेतकर हत्या करने के मामले में भी वह आरोपी था. इतना ही नहीं, मार्च 2023 में गुवा के बालजोड़ी इलाके में हुए बारूद लूटकांड में भी उसकी भूमिका बताई जाती है. लगातार हिंसक घटनाओं में शामिल रहने के कारण इस्माइल पूर्ति सुरक्षा बलों की हिट लिस्ट में था. उसकी मौत को पुलिस नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका मान रही है.
एक लाख का था इनाम
इस्माइल पूर्ति पर एक लाख रुपए का इनाम रखा गया था. वह संगठन के लिए रसद जुटाने का काम करता था. हाल ही में हुए रमेश चापिया की हत्या में भी वह शामिल था. इस्माइल पूर्ति घने जंगल में दस्ते को सुरक्षित रास्ता दिखाने में माहिर था. मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के हाथों उसके मारे जाने से संगठन को गहरा झटका लगा है.