जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): सरकारी स्कूल में पढ़ कर पुलिस सेवा में आने और डीएसपी से डीआईजी पद से सेवा निवृत्त होने तक का सफर तय कर चुके हैं राजीव रंजन. हमेशा सरकार और राज्य के विकास के लिए काम करने वाले पूर्व डीआईजी राजीव रंजन ने सेवा से निवृत्त होने का बाद भी लोक सेवा करने की सोची. सरकार से मिलने वाली पेंशन के बदले उन्होंने समाज में कुछ अच्छे बदलाव करने की ठानी है. इसके लिए वह एक NGO से मिल कर जिले के हर सरकार स्कूल का भ्रमण कर रहे है. वहां वे जागरुकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन करते हैं. सरकारी स्कूल के बच्चों को शिक्षा और आगे के जीवन की सही राह दिखाना ही इश कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रहता है.

शिक्षा के स्तर का लिया जायजा
इसी कड़ी में वह पोटका प्रखंड के गीतीलता हाई स्कूल पहुंचे. शिक्षा के संबंध में स्कूल में शिक्षा का स्तर का जायजा लिया. इस मौके पर डीआईजी राजीव रंजन का भव्य स्वागत किया गया. पूर्व डीआईजी राजीव रंजन का मानना है कि आजादी के 50 साल बाद उस बदलाव को देखने निकला हूं, जिसका अभाव उन्होंने महसूस किया है. उन्होंने कहा कि “आज पीछे मुड़कर देखता हूं तब लगता है कि इतने सालों में क्या कुछ बदला होगा? क्या आज भी सरकारी स्कूलों में वही चुनौतियां हैं जो हमारे ज़माने में थी? अभावों में पढ़-लिख कर कुछ बन जाना अपने आप में एक चुनौती है”. उसके तहत पूरे कोल्हान के पचास सरकारी स्कूलों का वे अपनी टीम के साथ दौरा करेंगे. वे देखेंगे कि बच्चों के समक्ष क्या चुनौतियां हैं. इस दौरे से वे बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास भरेंगे क्योंकि पचास साल पहले उन्होंने भी सुदूरवर्ती सरकारी स्कूल से ही पढ़ाई की और पुलिस सेवा तक का सफर तय किया. वे बच्चों के सामने एक उदाहरण के तौर पर खुद को पेश करेंगे ताकि बच्चे प्रेरणा ले सकें. साथ ही वे बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करेंगे.
रिपोर्ट: जमशेदपुर ब्यूरो
