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नक्सलवाद पर लगभग काबू पा लेने वाले झारखंड के लिए साइबर अपराध कितनी बढ़ी चुनौती, कैसे अभी भी काम कर रहा जामताड़ा मॉड्यूलर !

नक्सलवाद पर लगभग काबू पा लेने वाले झारखंड के लिए साइबर अपराध कितनी बढ़ी चुनौती, कैसे अभी भी काम कर रहा जामताड़ा मॉड्यूलर !

धनबाद (DHANBAD) : झारखंड में नक्सलवाद तो अब अंतिम सांसे गिन रहा है, लेकिन साइबर अपराध अब पूरे सिस्टम के लिए चुनौती बन गया हैं. समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर के लिए कभी जाना जाने वाले जामताड़ा से निकला गैंग आज पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है. पूरे देश की पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. पुलिस एक्शन जितना तेज है, उससे अधिक तेजी से साइबर अपराधियों का जाल फैल रहा है. 2010 के आसपास झारखंड के एक छोटे जिले जामताड़ा में साइबर अपराध का जन्म हुआ. उसके बाद तो इसकी कुख्यात ख्याति पूरे देश में फैल गई.

झारखंड का चार जिला अब तो पूरे देश में साइबर अपराध के लिए बदनाम हो गया है. जामताड़ा, धनबाद, गिरिडीह और देवघर पूरे देश में साइबर अपराध के लिए जाना जाने लगा है. बाबा नगरी को तो सेंट्रल प्वाइंट बना लिए है. एक आंकड़े के मुताबिक धनबाद में 2019 से लेकर 2025 तक कुल 700 मामले रिपोर्ट हुए हैं. वहीं देवघर में 691 मामले दर्ज किए गए हैं. जामताड़ा में 738 तो जमशेदपुर में 485, हजारीबाग में 435, गिरिडीह में 389, रामगढ़ में 283, पलामू में 279 ,लातेहार में 264 ,सरायकेला में 230, बोकारो में 200, दुमका में 201, गोड्डा में 199, चतरा में 194,  गढ़वा में 140, चाईबासा में 150, गुमला में 106, पाकुड़ में 95, साहिबगंज में 97, कोडरमा में 98, लोहरदगा में 85, खूंटी में 76 और सिमडेगा में 60 मामले रिपोर्ट हुए हैं. यह तो सभी जिलों के आंकड़े हैं, लेकिन अभी भी सबसे खतरनाक जामताड़ा ही है.

जानकारी के अनुसार अभी भी साइबर अपराध की दुनिया में जामताड़ा का पुराना तरीका ही और अपराधी सबसे ज्यादा एक्टिव हैं. जामताड़ा के अपराधी दूसरे जिले में जाकर अपराध कर रहे हैं. हाल के वर्षों में साइबर अपराधियों के विदेशी कनेक्शन भी सामने आ रहे हैं. इसका श्रेय भी जामताड़ा को ही जाता है. देशभर की पुलिस जामताड़ा सहित अन्य जिलों में छापेमारी कर रही है.

सबसे खतरनाक बात है कि पहले ठगी के पैसे देश के भीतर फर्जी कागजात पर खोले गए बैंक अकाउंट में जाते थे, अब वही पैसे विदेश के बैंक के अकाउंट में जाने लगे हैं.  Sextorsion और डिजिटल अरेस्ट भी साइबर अपराधियों की नई ठगी के तरीके हैं. जिसके जरिए साइबर अपराधी लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है. यह अलग बात है कि इससे निपटने के लिए एक्शन तेज है. फिर भी अपराध हो रहे हैं.

एक आंकड़े के मुताबिक साल 2025 के नवंबर महीने तक झारखंड के विभिन्न शहरों से 1200 से अधिक साइबर अपराधी गिरफ्तार किए गए, लेकिन साइबर ठगी अभी भी बदस्तूर जारी है. यह सब साइबर अपराधी किसी को नहीं छोड़ते. प्रशासनिक अधिकारी हो, पुलिस अधिकारी हो, नेता हो, मुख्यमंत्री हो किसी को नहीं बक्शते मतलब इन्हें किसी का कोई भय नहीं है.

यह अलग बात है कि लगातार गिरफ्तारियां हो रही है. लोग पकड़े जा रहे हैं, लेकिन साइबर अपराधियों के कदम रुक नहीं रहे हैं. कुल मिला जुलाकर कहा जा सकता है कि नक्सलवाद पर लगभग काबू पा लेने वाले राज्य झारखंड के लिए साइबर अपराधी अब बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े है.

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो

Published at:29 Dec 2025 10:20 AM (IST)
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