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राज्य में फैला फ्लू का संक्रमण, बढ़ गई है दवाओं की खपत, जानिए इनफ़्लूंजा की पूरी जानकारी व घरेलू उपचार

BY -
Padma Sahay
Padma Sahay
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 17, 2026, 5:36:09 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड में पारा गिरते ही चढ़ गया दवाओं की बिक्री का ग्राफ. प्रतिदिन करीब 5 से 6 करोड़ की सिर्फ फ्लू की दवाएं बिक रही है. इन दिनों झारखंड में कनकनी बढ़ाने के साथ ही लोगों में सामान्य फ्लू के अधिक लक्षण देखे जा रहे हैं. सर्दी खासी और बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है. बता दें अचानक हुए फ्लू की दवाईयों की बिक्री की बढ़ोतरी पिछले पंद्रह दिनों से देखी जा रही है इससे पहले ये कारोबार आधे से भी कम था. हालत ये है कि हर परिवार से दो या तीन सदस्य सर्दी जुकाम और बुखार से पीड़ित है. कोरोना के खौफ़जद लोग इस फ्लू को भी लेकर चिंतित है लेकिन चिकित्सकों का कहना है की ये साधारण फ्लू है और ऐसा मौसम के चेंज होने से हो रहा है. लोग इस बीमारी से बचाव के लिए शरीर मे उत्पन्न हो रहे लक्षणों के आधार पर दवाये ले रहे जिनमें पारासीटामॉल, कफ सिरप, और एलर्जी की दवा शामिल है. बता दें कि झारखंड में करीब पंद्रह से 18 हजार छोटे बड़े मेडिकल स्टोर है और इन सभी दुकानों मे सबसे अधिक फ्लू की दवाइयों की बिक्री हो रही है. ये बिक्री पिछले 15 दिनों मे अपने औसत से दुगुनी हो गई है. हर आदमी लगभग 500 रुपये की दवाई खरीद रहा है. इधर राज्य के रिम्स और सादर अस्पताल मे भी सामान्य फ्लू के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है. अस्पताल कर्मियों का कहना है की पहले की अपेक्षा दुगुने लोग फ्लू से पीड़ित होकर इलाज के लिए आ रहे हैं .

क्या है मौसमी फ्लू और सामान्य सर्दी

सामान्य सर्दी

शहरों में वायुमण्डलीय प्रदूषण हो या बदलते मौसम के मिजाज के कारण बीमार पड़ना आम बात है सामान्य सर्दी में कोई बहुत चिंता की बात नहीं होती है लेकिन जब बात सामान्य सर्दी से बढ़ जाए तो इसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. एक बात जो अक्सर लोगों को भ्रमित करती है वह है सर्दी को फ्लू समझना और फ्लू को सर्दी. हम में से बहुत से लोग जो फ्लू से पीड़ित हैं, वे इसे सर्दी या इसके विपरीत कहते हैं. समानता के बारे में हमारे पास केवल एक अस्पष्ट विचार है, लेकिन हम नहीं जानते कि वे कितने भिन्न हैं. छींकने, खांसी और बुखार के साथ हमें यह अजीब एहसास होता है, लेकिन हम नहीं जानते कि यह सामान्य सर्दी है या फ्लू. वास्तव में, ऐसे कई लक्षण हैं जो सर्दी की तुलना में फ्लू के लिए अलग हैं. हालांकि, सर्दी और फ्लू के बीच के अंतर को जानना बहुत जरूरी है. फ्लू अधिक विषैला होता है और अगर सर्दी के मुकाबले अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. सामान्यतः सर्दी को हल्की सांस की बीमारी के रूप में जाना जाता है और व्यक्ति कुछ दिनों में ये बिना किसी दवा उपचार के भी ठीक हो सकता है. इसे सामान्य सर्दी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह मौसमी श्वसन संक्रमण है. यह संभवतः दो सप्ताह के मामले में हल हो जाता है, और आम तौर पर गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण नहीं बनता है. सर्दी के कुछ लक्षण इस प्रकार है:

गले में खराश

नाक से पानी बहना या नाक का जाम होना

खांसी.

शरीर में दर्द

थकान

छींक आना

हालांकि सर्दी के लक्षण एक सप्ताह तक रहते हैं, लेकिन पहले तीन दिनों तक ये अपने अधिक प्रभावी रूप में होते है तथा अन्य को भी संक्रमित कर सकते है. चूंकि सामान्य सर्दी आमतौर पर प्रकृति में वायरल होती है, इसलिए एंटीबायोटिक दवाओं के लिए जाने की सलाह नहीं दी जाती है जब तक कि यह एक जीवाणु संक्रमण न हो जो ठंड का कारण बनता है. लक्षणों से राहत के लिए दवा दी जाती है. राहत के लिए एंटीहिस्टामाइन, डीकॉन्गेस्टेंट और एनएसएआईडी दिए जाते हैं. यह सलाह दी जाती है कि रोगी को निर्जलीकरण से बचने के लिए हाइड्रेटिंग करते रहना चाहिए .

फ्लू क्या है?

यहाँ एक सामान्य फ्लू के लक्षण सामान्य सर्दी के लक्षणों की तुलना में बहुत अधिक गंभीर होते हैं. इसे मेडिकल के टर्म में इन्फ्लुएंजा कहा जाता है, फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग है जो वायरस के कारण होता है. फ्लू विभिन्न प्रकार के होते हैं. फ्लू का वायरस नाक, आंख और मुंह के म्यूकस मेम्ब्रेन के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. फ्लू के कई प्रकार के वायरस होते हैं जिनमें से कुछ बेहद खतरनाक होते हैं. मानव इन्फ्लूएंजा वायरस ए और बी मौसमी बीमारियों का कारण बनते हैं. इन्फ्लुएंजा वायरस सी हल्के श्वसन संक्रमण का कारण बनता है. यह आमतौर पर प्रकृति में महामारी नहीं है. इन्फ्लूएंजा वायरस के बारे में एक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि उनमें से नए वेरियंट उभर कर महामारी का कारण बनते हैं. इनमें से बहुत अधिक गंभीर वायरस भी हैं जो गैर-मानव स्रोतों से आते हैं. एवियन (पक्षी) फ्लू, स्वाइन फ्लू , डॉग फ्लू, हॉर्स फ्लू. इन फ्लू विषाणुओं के कुछ उपभेद मनुष्यों में फैल सकते हैं और मृत्यु का कारण बन सकते हैं. आप में से ज्यादातर लोग स्वाइन फ्लू और एच1एन1 वायरस से अच्छी तरह वाकिफ हैं, जिसने हाल के वर्षों में तबाही मचाई है. पिछले कई तीन सालों से कोरोना ने भी पूरे विश्व में जमकर तबाही मचाही थी और अब इसके नए वेरियंट BF-7 ने चीन मे हड़कंप मचा कर रखा है.

फ्लू के सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

सूखी खांसी.

तेज बुखार .

गले में खराश.

ठंड लगना.

शरीर में तेज दर्द होना.

बहती नाक या नाक बंद होना.

सिरदर्द .

थकान.

फ्लू के प्रकार

फ्लू मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं, जिनके बारे में नीचे बताया गया है

टाइप ए फ्लू- टाइप ए वायरस आमतौर पर पक्षियों से आते हैं, और यह वायरस व्यापक रूप से फैल सकता है और महामारी में बदल सकता है. संक्रमण की उपेक्षा करना जीवन के लिए खतरा हो सकता है.

टाइप बी फ्लू- यह एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है जो केवल मनुष्यों को प्रभावित करता है.

टाइप सी फ्लू- टाइप सी वायरस मुख्य रूप से मनुष्यों और सूअरों को प्रभावित करते हैं. यह रोग स्थानीय महामारियों को जन्म दे सकता है.

टाइप डी फ्लू- फ्लू की यह श्रेणी मनुष्य को प्रभावित नहीं करती है.

फ्लू के लिए इलाज :

Tamiflu, Relenza, और Rapivab जैसे एंटीवायरस डॉक्टर द्वारा निर्धारित किए जाते हैं. डॉक्टर भरपूर आराम के साथ-साथ तरल पदार्थ के सेवन की सलाह भी देंगे. याद रखें, ये दवाएं किसी चिकित्सक के मार्गदर्शन में ही लें. फ्लू के लक्षण वाले लोगों को दस्त और उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. चूंकि फ्लू से निमोनिया हो सकता है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके किसी सामान्य चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए . साथ ही, गर्भवती महिलाओं, 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों और दो साल से कम उम्र के बच्चों को फ्लू के लक्षणों के साथ तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. फ्लू के लक्षण वाले किसी भी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, गले में अत्यधिक खराश, सीने में तकलीफ और बातचीत करने में परेशानी होती है, उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

मौसम के बदलाव से तबीयत खराब क्यों हो जाती है?

जब भी मौसम बदलता है तो तापमान में बदलाव वायरस के विभिन्न समूहों को पनपने के लिए एक उपयुक्त स्थिति प्रदान करता है जो बाद में संक्रामक रोगों को फैलाता है. वायरसों में सबसे आम मानव राइनोवायरस (एचआरवी) है जो सभी तबीयत खराब होने के 40 प्रतिशत तक के मामलों का कारण बनता है. वे ठंडे मौसम में पनपते हैं, जैसे कि वसंत और सर्दियों में. गर्मियों में मौसमी एलर्जी वाले लोगों में बहती नाक और आँखों में खुजली होती है जब वे पराग, फफूंदी या घास के पास होते हैं. उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली इन एलर्जी के प्रति प्रतिक्रिया करने में व्यस्त हो जाती है जिससे व्यक्ति वायरल हमलों की चपेट में आ जाता है. इन्फ्लुएंजा वायरस फ्लू का कारण बनता है जो ज्यादातर विभाजित और फैलता तब है जब हवा सर्द और शुष्क होती है जैसे की सर्दी के मौसम में. लेकिन कुछ मामूली सावधानियों और जीवनशैली में बदलाव के साथ मौसमी बीमारी को चकमा देना आपके लिए संभव है. राइनोवायरस के लगभग 100 ज्ञात उपभेद हैं जिसका अर्थ है कि एक टीका नहीं बनाया जा सकता है. चूंकि वायरस लगातार एक फ्लू के मौसम से दूसरे में बदल रहे होते हैं, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि आप सुरक्षा के लिए फ्लू का एक शॉट लें. राइनोवायरस शरीर के बाहर 3 घंटे तक जीवित रहता है, और कभी-कभी दरवाजे के हैण्डल या स्विच जैसी सतहों पर 48 घंटे तक रह सकता है. इस प्रकार अपने हाथों को नियमित रूप से धोना महत्वपूर्ण है और संक्रमण से खुद को बचाने और संभावित खतरों को दूर रखने के लिए अपने चेहरे को छूने से बचें.

फ्लू के घरेलू उपचार

फ्लू, जिसे मुख्य रूप से इन्फ्लूएंजा के रूप में जाना जाता है, एक सामान्य वायरल संक्रमण है जो श्वसन मार्ग को प्रभावित करता है. फ्लू या इन्फ्लूएंजा मुख्य रूप से नाक, गले, फेफड़े आदि सहित शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करता है. हर साल फ्लू दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है और हर साल फ्लू दुनिया में 6 लाख 50 हजार से अधिक लोगों को मारता है. भारत केवल हर साल इन्फ्लूएंजा के 10 मिलियन से अधिक मामले दर्ज करता है और हम इस वायरल संक्रमण के कारण हर साल हजारों लोगों को खो देते हैं. फ्लू से संक्रमित होने के लिए बच्चे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं. कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और मौसमी परिवर्तन फ्लू के प्रमुख कारण हैं. फ्लू एक आदमी से दूसरे आदमी में फैल सकता है फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए नियमित सावधानी जरूरी है. कुछ आसान टिप्स और घरेलू नुस्खों से फ्लू को ठीक किया जा सकता है. लहसुन का सेवन बढ़ाएं, भाप में सांस लें, खुद को हाइड्रेटेड रखें, अपने हाथों को साफ और साफ करें, अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखें, विटामिन-सी से भरपूर उत्पादों का सेवन करें, उचित आराम करें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं,हर्बल चाय पीने से फ्लू को ठीक करने में मदद मिलती है,नारियल पानी पिएं, कच्चे फल और सब्जियों का सेवन करें,गर्म नमकीन पानी से अपना मुंह गरारे करें,अगर गले में दर्द हो रहा है तो दालचीनी के तेल, पुदीने के तेल आदि आवश्यक तेलों से अपने गले की मालिश करें, सादा और तरल व उचित आहार लें, स्वस्थ भोजन का सेवन करें, अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएं, अस्वास्थ्यकर भोजन जैसे तेल मसाले व गरिष्ठ के सेवन से बचें

 घर पर फ्लू का इलाज करने के लिए नीचे बताए गए घरेलू उपचारों का पालन करें-

सामग्री: शहद, पानी और दालचीनी पाउडर

एक कटोरी में एक बड़ा चम्मच शहद लें और कटोरी को उबलते पानी के ऊपर रख दें ताकि शहद गुनगुना हो जाए. : एक चुटकी दालचीनी पाउडर को गुनगुने शहद के साथ मिलाएं.  शरीर में वायरस के प्रभाव को खत्म करने के लिए इस मिश्रण का सेवन दिन में दो बार करें. यह घरेलू उपचार फ्लू के प्रभावी घरेलू उपचारों में से एक है.

सामग्री: प्याज और शहद

एक प्याज़ लें और उसका रस निकालने के लिए एक कटोरी में मैश कर लें. निकाले गए रस में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं और एक अच्छा मिश्रण पाने के लिए दोनों सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाएं. इन्फ्लूएंजा से जल्दी राहत पाने के लिए इस मिश्रण को दिन में तीन बार पिएं. यह फ्लू के लिए प्रभावी घरेलू उपचारों में से एक है.

सामग्री: मेथी पाउडर, नींबू का रस, शहद, अदरक और पानी

एक गिलास गर्म पानी लें और उसमें 4 बड़े चम्मच मेथी पाउडर, 4 बड़े चम्मच नींबू का रस, एक बड़ा चम्मच शहद और एक बड़ा चम्मच अदरक का पेस्ट मिलाएं. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें और मिश्रण को 15 मिनट तक उबालें. इस मिश्रण को दिन में दो बार पीने से इन्फ्लुएंजा से होने वाले बुखार का इलाज होता है. फ्लू के लिए इस घरेलू उपाय का नियमित रूप से पालन करें.

सामग्री: अदरक, नींबू, ग्रीन टी बैग और पानी

एक गिलास उबलते पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ अदरक और एक बड़ा चम्मच नींबू का रस मिलाएं और एक ग्रीन टी बैग को एक गिलास पानी में डुबोएं. ग्रीन टी बैग को एक गिलास मिश्रण में 10 से 15 मिनट के लिए भिगोकर रखें. इन्फ्लूएंजा के कारण बंद गले को साफ करने के लिए इस चाय को दिन में दो बार नियमित रूप से पियें. यह घरेलू उपचार फ्लू के लिए सबसे प्रभावी घरेलू उपचारों में से एक है.

सामग्री: अदरक, सौंफ, दालचीनी, पुदीने के पत्ते, शहद, पानी और इलायची

चार कप पानी लें और उसमें एक बड़ा चम्मच सौंफ, एक टुकड़ा पिसा हुआ अदरक, एक छोटा टुकड़ा दालचीनी, कुछ पुदीने की पत्तियां, 3 पिसी हुई इलायची के दाने, एक बड़ा चम्मच शहद मिलाएं. इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक कि यह अपनी प्रारंभिक मात्रा का आधा न हो जाए. कंजेशन की समस्या को दूर करने के लिए इसकी भाप को अंदर लें. इस मिश्रण को नियमित रूप से दिन में एक या दो बार पियें. फ्लू के लिए यह घरेलू उपचार फ्लू के इलाज के लिए शक्तिशाली घरेलू उपचारों में से एक है.

कितना खतरनाक है फ्लू

वैसे तो इंफ्लूएंजा अधिकांश मामलों में चार से पांच दिनों से लेकर दो हफ्ते के अंदर ही ठीक हो जाता है, लेकिन, इस दौरान जब दिक्कतें बढ़ती हैं तो मरीज को निमोनिया भी हो सकता है. इसका असर बढ़ने पर, साइनस और इंफेक्शन भी हो सकता है. फ्लू के बाद निमोनिया बढ़ जाने पर हार्ट, ब्रेन और मसल्स में स्वेलिंग बढ़ने लगती है. हार्ट में मायोकार्डाइटिस (myocarditis), ब्रेन में एनसिफ़लाइटिस (Encephalitis) और मसल्स में मायोसाइटिस (myositis) हो जाता है. इनकी वजह से मल्टी ऑर्गेन फेल्योर होने का खतरा बढ़ जाता है और उसकी जान भी जा सकती है. फ्लू से होने वाली जातिलटाए न्यूमोनिया, कान में संक्रमण, साइनस संक्रमण,कोंजेस्टिव दिल विफलता, दमा, मधुमेह, छींक आना एलर्जी, सिर दर्द, मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला संक्रमण होते है. इसलिए फ्लू को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है.

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