रांची (RANCHI): झारखंड में सरकारी शिक्षकों के वेतन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. राज्य के हजारों शिक्षक पिछले दो महीनों से वेतन के इंतजार में हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है. इस मुद्दे को लेकर झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ (JPSS) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और एक सप्ताह के भीतर समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.
संघ का दावा है कि राज्य के 80,000 से अधिक शिक्षकों को मार्च और अप्रैल 2026 का वेतन अब तक नहीं मिला है. इतना ही नहीं, फरवरी महीने का वेतन भी आयकर कटौती के कारण आंशिक रूप से ही जारी किया गया. इस स्थिति ने शिक्षकों की परेशानी और बढ़ा दी है. इस मामले को लेकर संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू और महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है. उन्होंने बताया कि 24 जिलों में जिला कोषागार स्तर पर कथित अनियमितताओं की जांच के नाम पर सभी श्रेणी के शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है.
संघ ने कहा कि वेतन में देरी का सीधा असर शिक्षकों के जीवन और उनके कार्य पर पड़ रहा है. कई शिक्षक अपने घर से दूर पदस्थापित हैं और लगातार दो महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है. संघ का मानना है कि जांच प्रक्रिया को नियमित वेतन भुगतान से जोड़ना उचित नहीं है और इससे निर्दोष शिक्षकों को नुकसान हो रहा है. JPSS ने सरकार से मांग की है कि शिक्षकों से स्व-घोषणा पत्र लेकर एक सप्ताह के भीतर बकाया वेतन जारी किया जाए. साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने की भी बात कही गई है.
महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने कहा कि यदि कहीं अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई भी जरूरी है, लेकिन इसका खामियाजा सभी शिक्षकों को भुगतना न्यायसंगत नहीं है. संघ ने साफ कर दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर वेतन भुगतान नहीं किया गया, तो पूरे राज्य में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी.