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दुमका के जंगलों में फिर लगी आग, जिम्मेवार कौन? गर्मी या फिर......

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 5:59:53 AM

दुमका (DUMKA)प्रकृति की गोद में बसा है झारखंड की उपराजधानी दुमका. ऊंची ऊंची पहाड़ियां और उस पर हरे भरे पेड़ बरबस लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है. लेकिन गर्मी के दस्तक देते ही यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को किसी की नजर लग जाती है. पहाड़ी पर आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया. मसलिया प्रखंड के पहाड़ों पर लगी आग की लौ बुझी नहीं कि कल शाम शहर से सटे ऐतिहासिक हिजला पहाड़ के जंगलों में आग लग गयी. आग की विभीषिका को देखते हुए दमकल की गाडियां मौके पर पहुची और रात भर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया.

महुआ चुनने के लिए लगाते हैं आग 

सवाल उठता है कि जंगल में आग लगती है या लगायी जाती है. सूत्रों की माने तो आग लगाई जाती है. आग लगाने का उद्देश्य या तो जंगल से महुवा चुनना होता है या फिर इमारती पेड़ काटना. दरअसल दुमका के पहाड़ों पर काफी संख्या में महुवा के साथ साथ इमारती पेड़ है. महुवा यहाँ के ग्रामीणों के जीवकोपार्जन का आधार माना जाता है. महुवा चुनने के लिए लोग पेड़ के नीचे गिरे पत्तो में आग लगा देते हैं जो जंगल में आग का रूप ले लेता है.

लकड़ी माफिया भी जिम्मेवार

वहीं दूसरी ओर जिले में लकड़ी माफिया भी सक्रिय है. जो रात के अंधेरे में घने जंगल से पेड़ काटकर लकड़ी की तस्करी करते हैं. जंगल है तो जंगली जानवर और कीड़े मकोडे का ख़ौफ़ रहेगा ही. जंगल में आग लगने से जंगली जानवर और कीड़े मकोड़े या तो जल कर मर जाते हैं या फिर जलकर राख हो जाते हैं. उसके बाद बेख़ौफ़ होकर वन माफिया रात के अंधेरे में जंगल मे विचरण करते हैं .

लोगों को होना होगा जागरूक 

हर साल जंगल में आग लगने से एक तरफ जहां जंगली जीव जंतु के अस्तित्व पर संकट का बादल मंडरा रहा है वही इको सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है. जंगल की सुरक्षा वन विभाग का दायित्व है लेकिन इसके लिए आम लोगों को भी जागरूक होना होगा. समझना होगा कि जंगल ना रहने से मानव के अस्तित्व पर भी संकट के बादल छाने लगेंगे.

रिपोर्ट: पंचम झा

Tags:JharkhandDumkaFire broke out in Dumka's forestsFire in jangal

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