TNP DESK- दुमका में डीआईजी कार्यालय के सामने हुए सनसनीखेज गोलीकांड के 15 दिन बाद भी पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच सकी है। संताल परगना मोटर मजदूर संघ के अध्यक्ष अरुण सिंह को गोली मारकर घायल किए जाने की घटना के बाद अब पुलिस की कार्यशैली को लेकर विभिन्न संगठनों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
संगठनों का बड़ा फैसला, कल से बस सेवा ठप
सोमवार को दुमका बस स्टैंड में विभिन्न संगठनों की आपात बैठक हुई। बैठक में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए मंगलवार सुबह से दुमका से बसों का परिचालन अनिश्चितकालीन बंद करने का निर्णय लिया गया। साथ ही बस स्टैंड की सभी दुकानें भी बंद रखने का ऐलान किया गया है।
पीड़ित अरुण सिंह का पुलिस पर हमला
गोलीकांड में घायल अरुण सिंह ने इलाज कराकर दुमका लौटते ही पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि घटना के इतने दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। उन्होंने कहा कि अगर अपराध होता है तो उसका खुलासा भी होना चाहिए, नहीं तो अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और ऐसी घटनाएं बार बार होती हैं।
पुराने हमले में भी पुलिस की ढिलाई का आरोप
अरुण सिंह ने बताया कि दो साल पहले भी उन पर जानलेवा हमला हुआ था। उस मामले में एक आरोपी को पकड़कर पुलिस को सौंपा गया था, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस हथियार बरामद नहीं कर पाई और टीआई परेड भी नहीं कराई गई। नतीजतन आरोपी को जल्द ही जमानत मिल गई और वह बाहर आ गया।
सरकारी अस्पताल की बदहाली उजागर
अरुण सिंह ने दुमका की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि गोली लगने के बाद अस्पताल पहुंचने पर सिर्फ दो इंजेक्शन दिया गया, पट्टी तक नहीं की गई। सर्जरी के लिए भेजे जाने पर बताया गया कि जनरेटर में डीजल नहीं है और डॉक्टर भी मौके से गायब हो गए। हालात बिगड़ते देख सहयोगियों की मदद से उन्हें दुर्गापुर ले जाया गया।
स्वास्थ्य मंत्री को खुली चुनौती
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि एक दिन अपने बच्चे का इलाज सरकारी अस्पताल में कराकर देखें, शायद कफ सिरप भी न मिले। उन्होंने कहा कि मंत्री और विधायक तो बड़े शहरों में इलाज करा लेते हैं, लेकिन आम जनता बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के भरोसे छोड़ दी गई है।
एसपी के बयान पर भी कड़ा पलटवार
अरुण सिंह ने एसपी के उस बयान को भी चुनौती दी जिसमें घटना के दूसरे एंगल की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस दूसरा एंगल साबित कर दे तो वह दुमका छोड़ देंगे, क्योंकि उनका किसी जमीन, गिट्टी या बालू माफिया से कोई संबंध नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी से आंदोलन का रास्ता
अरुण सिंह ने कहा कि बस परिचालन बंद करना समाधान नहीं है, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता ने उन्हें इस कदम के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने बस सेवा बंद होने से आम लोगों को होने वाली परेशानी के लिए खेद भी जताया, लेकिन कहा कि न्याय के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।
रिपोर्ट पंचम झा
