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कम बारिश से मायूस है गुमला के किसान, धान की खेती करना हुआ मुश्किल

BY -
Sushil Singh  Gumla
Sushil Singh Gumla
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 10:22:11 PM

गुमला (GUMLA):गुमला जिला में अब  तक पर्याप्त बारिश नहीं होने की वजह से धान की सही रूप से बोवाई नहीं हो पाई है. जिसकी वजह से किसानों में काफी उदासी देखी जा रही  है. हालांकि किसान दिनभर इस उम्मीद में रहते हैं कि पर्याप्त बारिश हो जाने के बाद उनके खेतों में पानी आ जायेगा. ताकि धान की बोवाई कर सके.

कम बारिश की वजह से किसानों के चेहरे पर छाई उदासी

वहीं आपको बताएं कि किसानों का स्पष्ट मानना है कि यदि सही रूप से धान की बुवाई नहीं हो पाई, तो उनका साल भर खाने का खर्चा नहीं चल पाएगा. ऐसे में उन्हें दो वक्त के भोजन के लिए भी सोचना पड़ेगा. झारखंड का गुमला जिला में अधिकांश आबादी पूरी तरह से खेती पर आश्रित  है, लेकिन जिले में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं होने की वजह से यहां की खेती पूरी तरह से मानसून पर आश्रित है.

दो-चार दिन में नहीं हुई बारिश तो नहीं हो पाएगी धान की खेती

वहीं इन दिनों  सही रूप से बारिश नहीं होना  किसानों के लिए सबसे बड़ी परेशानी की वजह  बना हुआ है. अगस्त का महीना आ चुका है,बावजूद इसके अब  तक धान की बुवाई तक नहीं हो पाई है. जिसकी वजह से किसान काफी चिंतित है.किसानों को ऐसा लग रहा है कि अगर कुछ दिनों में धान की बुवाई नहीं हो पाई, तो उनकी फसल नहीं हो पाएगी. और उनकी आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ सकती है.किसानों के पास दो वक्त का भोजन का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो सकता है.

गुमला के किसान धान पर ही रहते हैं आश्रित

हालांकि सरकार की ओर से किए जा रहे आकलन को लेकर किसानों में किसी प्रकार का उत्साह नहीं दिख रहा है.किसानों का स्पष्ट मानना है कि सरकार अपनी ओर से हर बार आकलन करती है, लेकिन किसानों को जो मुआवजा और राहत मिलना चाहिए वो कभी नहीं मिल पाता है. ऐसे में किसानों को यही उम्मीद हैं कि अगर सही रूप से बारिश हो जाती है तो निश्चित रूप से  धान की बुवाई हो पाएगी और उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ने की स्थिति बनी हुई है उसमें कुछ हद तक सुधार हो सकता है.

सालों भर आर्थिक संकट से जूझना पड़ेगा किसानों को

आपको बता दें कि  गुमला जिले में धान की खेती किसानों के लिए कितना अहमियत रखता है. इस बात का अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि जिले के कई किसान अपनी स्थिति को बेहतर करने के लिए और रोजगार के लिए दूसरे शहरों में चले जाते हैं, लेकिन जैसे ही मानसून की शुरुआत होती है किसान अपने पूरे परिवार के साथ अपने गांव घर में वापस आकर धान की खेती में लग जाते हैं. लेकिन इस बार मानसून की जो स्थिति बनी है वैसे में किसानों में पूरी तरह से मायूसी छा गई है. प्रतिदिन किसान खेतों की ओर जा तो रहे हैं, लेकिन खेतों में जमी पानी को देखकर उन्हें निराशा हो रही है. उन्हें स्पष्ट लग रहा है कि अगर भगवान की कृपा जल्द नहीं होती है,तो निश्चित रूप से उनके लिए आनेवाले दिन काफी परेशानी भरे हो सकते हैं.

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