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राज्य गठन के 23 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है झारखंड का ये गांव, जानिए क्या कहते हैं प्रशासनिक पदाधिकारी 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 13, 2026, 3:29:20 PM

गुमला(GUMLA):  झारखंड के अलग राज्य बने भी दो दशक से अधिक वक्त बीत गया लेकिन जंगल से घिरे पहाड़ पर बसे गांव की न तो तस्वीर बदली और न ही यहां के लोगों की तकदीर. आज भी झारखंड के कई गांव में बदहाली देखने को मिल रही है. विकास की तो कई बातें होती हैं लेकिन आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही. जिसको लेकर लोगों में काफी निराशा है.  वही जिला के प्रशासनिक पदाधिकारी मानते है कि विकास निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो धीरे धीरे चल रहा है. 

आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे गांव के लोग 

आज ही के दिन 15 नवम्बर 2000 को जब झारखंड एक अलग राज्य के रूप में स्थापित हुआ था तब लोगों को यह खुशी थी कि अब झारखंड के दूरदराज के उन गांव की तस्वीर बदल जाएगी जो बिहार में शामिल होने के कारण राज्य की तत्कालीन राजधानी पटना से दूर होने के कारण विकास से पूरी तरह वंचित था. लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि झारखंड बनने के दो दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी गांव की स्तिथि पूरी तरह से बदहाल बनी हुई है. आज भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर ना केवल बिरसा मुंडा को सम्मान दिया जाता है बल्कि राज्य स्थापना के दिवस को उत्साह के रूप में मनाया जाता है लेकिन यह केवल बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण तक ही सीमित होकर रह गया है. जिला के ग्रामीण क्षेत्र के स्तिथि को देखकर आज भी लोग काफी चिंतित है.  लोगों का कहना है कि 23 साल का समय बहुत बड़ा समय होता है लेकिन आज भी मूलभूत सुविधा नहीं मिलना चिंता का विषय है.  वही जिला के कांग्रेस के जिलाध्यक्ष चैतू उरांव की माने तो राजनीति मुद्दे से ऊपर उठकर बात करे तो इलाके की बदहाली को देखकर लगता है कि आज भी सूबे में गरीबो की चिंता करने वाले राजनेता का अभाव है वही कारण है कि गांव की स्तिथि लगातार मूलभूत सुविधाओ से वंचित है. 

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विकास की राह पर आज भी झारखंड पीछे 

वही झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन करने वाले शहजाद अनवर की माने तो उन लोगों ने झारखंड अलग राज्य को लेकर पूरी ईमानदारी से आंदोलन किया था ताकि उनके गांव घर की जो बदहाली है वह ठीक हो सके. लेकिन आज की स्तिथि को देखकर लगता है कि झारखंड अलग राज्य बनने का लाभ केवल झारखंड के उन राजनेताओं को मिला जो सम्मिलित बिहार में लूट नहीं कर सकते थे उनके लिए झारखंड लूट का एक अवसर प्रदान किया है.  वही देखने को मिल रहा है जहाँ पदाधिकारी व राजनेता दोनों लूट में लगे हुए है. वही स्थानीय वरिष्ठ नेता आशिक अंसारी की माने तो एक साथ तीन राज्य बना लेकिन आज छत्तीसगढ़ व उत्तराखंड विकास में आगे है लेकिन वही झारखंड आज भी विकास में पीछे है. 

वही इस बाबत जब जिला के डीसी कर्ण सत्यार्थी से बात किया गया तो उन्होंने भी माना कि विकास उस स्तर पर नहीं हो पाया है जिस स्तर पर होनी चाहिए थी. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि विकास  एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जो धीरे धीरे गांव तक पहुंच रही है जिससे जल्द ही गांव में सम्पूर्ण विकास देखने को मिलेगा. 

 रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह 

Tags:jharkhandgumlajharkhand foundation daybirsa mundavillage of Jharkhand is deprived of basic facilities

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