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EPFO VS CMPFO: कोयलकर्मी पूछ रहे सवाल-क्यों कमजोर किया जा रहा "उनके बुढ़ापे की लाठी" को !

BY -
Satya Bhushan Singh   Dhanbad
Satya Bhushan Singh Dhanbad
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 9:40:18 AM

धनबाद(DHANBAD) : सीएमपीएफओ (कोयला खान भविष्य निधि संगठन) के अस्तित्व पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे है. यह मांग उठ रही है कि सीएमपीएफओ का विलय  कर दिया जाए. यह अलग बात है कि कोयलाकर्मियों की भविष्य निधि राशि की देखभाल करने वाला संगठन सीएमपीएफओ की ब्याज दर में लगातार कमी हो रही है. दूसरी ओर ईपीएफओ में ब्याज दर सीएमपीएफओ से अधिक है. ईपीएफओ ने जहां 24-25 के लिए 8.25 प्रतिशत ब्याज दर की अनुशंसा की है, तो सीएमपीएफओ बोर्ड ने 24- 25 के लिए 7.6 प्रतिशत ब्याज दर के अनुशंसा की है. यह कहना गलत नहीं होगा कि भविष्य निधि को बुढ़ापे की लाठी माना जाता है. इसी पैसे के सहारे सेवानिवृत कर्मी अपना जीवनयापन करते है. कोयलाकर्मियों कि भविष्य निधि राशि की देखभाल करने वाले संगठन में ब्याज दर कम है. इस वजह से कोयलाकर्मियों को आर्थिक क्षति हो रही है. अब तो यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि सीएमपीएफओ को ईपीएफओ में विलय कर दिया जाए. हालांकि यह कोई नया प्रस्ताव नहीं है. यह पुराना प्रस्ताव है. वैसे कोल माइंस पेंशनर्स एसोसिएशन सीएमपीएफओ को कोल इंडिया में विलय करने की वकालत कर रहा है. 

2016-17 में आया था विलय का प्रस्ताव 

यह अलग बात है कि 2016-17 में केंद्र सरकार की ओर से सीएमपीएफओ को ईपीएफओ में विलय का प्रस्ताव लाया गया था. उस समय कोयला उद्योग में संचालित मजदूर संगठन ताकतवर थे. मजदूर संगठनों के विरोध के कारण यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया. उस समय विलय की योजना बना ली गई थी. अब जाकर, सीएमपीएफओ को मजबूत करने के लिए कोल इंडिया मैनेजमेंट ने प्रति टन कोयले पर ₹20 देने का प्रस्ताव किया है. कोयला मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद यह राशि सीएमपीएफओ को मिलने लगेगी. सीएमपीएफओ की राशि में गड़बड़ी और दुरुपयोग करने के भी आरोप लगते रहे है. सूत्रों के अनुसार सितंबर 2020 से कोल इंडिया ₹10 प्रति टन सहयोग राशि पेंशन फंड में देती आ रही है. लेकिन अब ₹20 प्रति टन देगी. इससे पेंशन फंड को निश्चित रूप से मजबूती मिलेगी. फिलहाल सीएमपीएफओ में पेंशन लेने वालों की संख्या अधिक है, जबकि पेंशन फंड में अंशदान करने वालों की संख्या लगातार घट रही है. 

साल दो हज़ार में मिलता था 12% की दर से ब्याज

दरअसल, 2000 में कोयलाकर्मियों को 12% की दर से ब्याज मिलता था. जो घटते-घटते अब 2025 में 7.6 0% हो गया है. 2024 में भी  7.6 0% ही था. जबकि उसके पहले के वर्ष में अधिक था. बता दें कि कोयलाकर्मियों को प्रोविडेंट फंड पर मिलने वाले  ब्याज की दर बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की बैठक में तय होता है. इसके अध्यक्ष कोयला सचिव होते है. ज्यादातर सदस्य सरकार के अधिकारी या उनके मनोनीत प्रतिनिधि होते है. ब्याज दर का निर्धारण बहुमत के आधार पर होता है. इसमें ट्रेड यूनियन के चार प्रतिनिधि बैठते है. यही वजह है कि यूनियन के बहुत विरोध का असर बैठक में नहीं हो पाता. कोयलाकर्मियों के मूल वेतन से 12 फ़ीसदी राशि कटती  है. उतनी प्रतिशत राशि कोयला कंपनिया  देती है. बताया जाता है कि सरकार कोयलाकर्मियों का पैसा शेयर में लगाती है. मजदूर संगठन इसका विरोध करता रहा है. शेयर में पैसा डूबने का असर कोयलाकर्मियों की आय पर पड़ता है. यही वजह है कि एक समय 12% तक ब्याज मिलता था, जो आज घटकर 7.60% हो गया है.   

रिपोर्ट-धनबाद ब्यूरो 

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