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दुमका में बाल विवाह उन्मूलन जागरूकता पर दिया गया जोर, बाल विवाह के खिलाफ बगावत करने वाली दो किशोरियों को मिला सम्मान

BY -
Prakash Tiwary
Prakash Tiwary
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 7:16:28 AM

दुमका(DUMKA): बाल विवाह कानूनन अपराध है. इसे जानते सभी हैं लेकिन मानते बहुत कम लोग हैं और आज के समय में जिसने इसे मान लिया वह सचमुच सम्मान का हकदार है.

बहुत कुछ यही नजारा आज दुमका के इंडोर स्टेडियम में देखने को मिला. जहां कल्याण विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया गया था. कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह उन्मूलन जागरूकता विषय पर वक्ताओं ने अपनी अपनी राय रखी. बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए डीसी रविशंकर शुक्ला ने बाल विवाह के दुष्परिणामों को गिनाया. उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां यह कानूनन अपराध है, वहीं दूसरी ओर इससे लड़कियों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ता है. उन्होंने कहा कि वैसे तो लड़कियों के विवाह की उम्र 18 वर्ष निर्धारित है लेकिन जब तक लड़कियां पढ़ लिख कर अपने पैरों पर खड़ी ना हो जाए तब तक अभिभावक उनका विवाह ना कराएं तो बेहतर होगा.

दो किशोरियों को किया गया सम्मानित

वैसे तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाता है, लेकिन इस वर्ष 8 मार्च को होली का सार्वजनिक अवकाश रहने के कारण आज 10 मार्च को दुमका के इंडोर स्टेडियम में कल्याण विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया. इस मौके पर बेहतर कार्य करने वाली महिला कर्मियों को सम्मानित किया गया. सम्मान समारोह के दौरान दो ऐसी किशोरियों को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने घर से बगावत कर खुद अपनी शादी रोकवाई. क्योंकि दोनों नाबालिग थी. इन किशोरियों का नाम चांदनी राय और निशा राम है. चांदनी राय रानीश्वर प्रखंड के पाकुरिया गांव की रहने वाली है जबकि निशा राम शिकारीपाड़ा प्रखंड के गंधरकपुर गांव की रहने वाली है. वर्ष 2022 में दोनों के अभिभावक ने शादी तय कर दी, लेकिन जब दोनों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने चाइल्ड लाइन के नंबर पर कॉल कर वस्तुस्थिति की जानकारी अधिकारियों को दी. सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन की टीम सक्रिय हुई और दोनों के घर पहुंच कर अभिभावकों को समझा-बुझाकर दोनों की शादी रुकवाई. इन दोनों किशोरियों को डीसी द्वारा शॉल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. सम्मान पाकर दोनों किशोरियां काफी खुश नजर आयी और कहा कि बाल विवाह के खिलाफ उनका अभियान जारी रहेगा.

सचमुच दोनों किशोरी ने परिवार के निर्णय के खिलाफ बगावत कर एक साहसिक कार्य किया. जिस बाल विवाह को सामाजिक कुरीति के साथ-साथ कानूनन अपराध माना जाता है, उसके खिलाफ दोनों ने जो कार्य किया उसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है. जरूरत है अन्य लोगों को भी बाल विवाह के खिलाफ जागरूक होने की तभी समाज से यह कुरीति समाप्त हो पायेगा.

रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका  

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